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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "फेसबुक से "

सोशल मीडिया को उसके सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष के साथ ही देखा जाना चाहिए

लेकिन इसे वैकल्पिक मीडिया नहीं कहा जाना चाहिए

उर्मिलेश/ सोशल मीडिया लोगों को सूचना और थोडा ज्ञान तो दे रहा है. पर इसका बड़ा हिस्सा लोगों से उनकी सह्रदयता और संवेदना छीन रहा है. समझदार बनाने की जगह अनेक लोग…

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मेनस्ट्रीम मीडिया ने खुद को विपक्ष के विरुद्ध खड़ा कर दिया

नरेन्द्र नाथ मिश्रा / इन दिनों मेनस्ट्रीम मीडिया खासकर टीवी के सामने यू ट्यूब और अल्टरनेटिव मीडिया के अधिक तेजी से पसरने पर बहस हो रही है। वहां विपक्षी स्पेस से जुड़े आवाज के अधिक मजबूत होने पर बहस हो रही है। इसके लिए लंबी-लंबी दलील दी जा रही है। जबकि इसका बहुत आसान…

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इंडिया टुडे ग्रुप का बुर्जुआजी-सर्वहारा मॉडल

मीडिया संस्थान ग़ैरबराबरी का अड्डा!

विनीत कुमार/  एक ही मीडिया संस्थान इंडिया टुडे ग्रुप की एक मीडियाकर्मी हैलिकॉप्टर से उड़कर ज़मीन पर देश के मेहनतकश लोगों के बीच उतरती हैं और जिन्हें कई बार भकुआए अंदाज़ से लोग देखते…

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अब आर्थिक तंगी की चपेट में आएगा कारोबारी मीडिया

विनीत कुमार/  पैसे के मामले में चुनाव, कारोबारी मीडिया के लिए बाढ़ की तरह आता है. इस बाढ़ में मृतप्राय संस्थान भी जी उठते हैं और कई रातोंरात प्लेटफॉर्म खड़े हो जाते हैं. चुनाव ख़त्म होते ही बाढ़ के पानी की तरह पैसा कम होने लग जाता है और धीरे-धीरे इतना कम कि ज़रूरी खर्चे पर भी रोक…

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जी मीडिया के लद गए अच्छे दिन ?

विनीत कुमार/ जी मीडिया समूह और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चन्द्रा इन दिनों बहुमत की सत्ता से नाराज़ चल रहे हैं. वह सत्ता जिसका कभी उन्होंने हिस्सा होना चाहा और इसके लिए अपने समाचार चैनल जी न्यूज को भी इस काम पर लगा दिया, भले ही इससे चैनल की साख मिट्टी में क्यों न मिल गयी हो. च…

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कारोबारी मीडिया ने इस देश को एक हताश लोकतंत्र में बदल दिया

विनीत कुमार/ लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण के मतदान को लेकर जो प्रतिशत हमारे सामने हैं, वो चिंता पैदा करनेवाला है. कोई राजनीतिक पार्टी हारेगी और कोई जीतेगी, इससे पहले ही कारोबारी मीडिया ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को एक हताश लोकतंत्र की तरफ धकेलने का काम किया है.…

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हमें सुनाई भी दे रहा है, दिखाई भी दे रहा है और आपको अंजना मैम?

चैनल को पता है कि हऊआ पैदा करने से वो कंटेंट के बारे में सोचना छोड़ देंगे...

विनीत कुमार/ आजतक चैनल ने अपने प्राइम टाइम शो राजतिलक में हेलीकॉप्टर जोड़ा है. इसके जर…

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क्या मीडियाकर्मियों की ये हरकत राष्ट्रहित में है

विनीत कुमार/ संसद भवन के भीतर स्मोक केन/बम की ख़बर के लेकर देश के प्रमुख चैनलों के संवाददाताओं ने संसद भवन के बाहर जो हरकत की है वो मीडिया और लोकतंत्र को शर्मसार करनेवाली है. पीली रंग की च़ीज को लेकर जिसके बारे में न्यूजरूम से लगातार स्मोक बम/केन बताया जाता है, उनके आपस में छीना-…

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तो यह सूची भी जायज है..

अपने अंदर झांककर देखना भी जरूरी

नागेंद्र प्रताप/ हमारे जो पत्रकार मित्र विपक्षी गठबंधन द्वारा कुछ पत्रकारों के बायकॉट की घोषणा से बुरी तरह आहत हैं, उन्हें दरअसल उस वक्त आहत होना चाहिए था जब ये या ऐसे पत्रकार पत्रकारित…

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चैनल क्या सूचना के स्तर पर आपको समृद्ध कर रहा है

इससे कहीं ज़्यादा विज्ञापन में सूचनाएं, रेप्लिका तैयार करना ही अब चैनल की पत्रकारिता !

विनीत कुमार/ G20 को लेकर CII (कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन…

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दरअसल राहुल कँवल, इंडिया टुडे ने आपको धोखे में रखा

विनीत कुमार/ पिछले दिनों इंडिया बनाम भारत को लेकर इंडिया टुडे चैनल पर राहुल कँवल ने जो कार्यक्रम पेश किया, उसे लेकर मैंने एक पोस्ट लिखी. उस पोस्ट पर जितनी प्रतिक्रिया आयी, उनमें से एक पढ़ते हुए लगा कि टिप्पणी करनेवाले अभय ( Abhai Srivastava) ने यह समझा कि स्टूडियो में बैठकर राहुल…

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ये इसरो और भारतीय वैज्ञानिकों की शाम है, न्यूज एंकरों की नहीं

विनीत कुमार न्यूज एंकरों में इतनी भी समझदारी नहीं बची है कि वो अपने दर्शकों को बता सकें कि आज इसरो और उनके वैज्ञानिकों का दिन है. ख़ुद ही फैन्सी ड्रेस प्रतियोगिता में शामिल होकर उन्हें अपदस्थ करने में लगे हैं. हम भारतीय आज जिनके बूते जश्न मना रहे हैं, स्क्रीन पर उनके होने का …

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ख़ुशफहमी कि चैनलों पर लौट आयी पत्रकारिता

विनीत कुमार/ इन दिनों न्यूज एंकरों की पूरी कोशिश अपने दर्शकों के बीच यह ख़ुशफहमी पैदा करने की है कि चैनलों पर पत्रकारिता लौट आयी है. मेरी अपनी समझ है कि चैनलों से पत्रकारिता इतनी दूर चली गयी है कि कोई एंकर जाकर वापस लाने की भी कोशिश करें तो ख़ुद इस इन्डस्ट्री में न लौट पाएंगे. मी…

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क्या तुम अपने भीतर से दिल और दिमाग़ दोनों निकालकर एक डब्बे के तौर पर न्यूजरूम में शामिल हो सकते हो ?

सिर्फ मास कॉम का कोर्स करके मीडियाकर्मी नहीं बन सकते

विनीत कुमार/ देश के प्रिय युवा/ टीनएजर्स !

यदि आप बारहवीं या स्नातक( ग्रेजुएशन) के बाद जर्न…

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चैनलों ने समाज को इस लायक रहने भी दिया ?

किस भरोसे से लोग मदद के लिए सामने आएंगे

विनीत कुमार/ हालांकि है तो यह बेहद ही शर्मनाक बात कि बीच सड़क पर, दर्जनों लोगों के आते-जाते बीच गुरुग्राम में 23 साल का एक युवक महिला पर दनादन वार करता है, बेतहाशा चाकू चलाता …

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हमारे न्यूज एंकर मीडियाकर्मियों की हिन्दी

विनीत कुमार/ न्यूज चैनल देखते हुए कभी आप इस सिरे से सोचते हैं कि जिस हिन्दी ने औसत दर्जे के मीडियाकर्मी को शोहरत, दौलत और ताक़त दी, उनकी उस हिन्दी को सुनते हुए हम अपने बच्चों को ऐसी ही भाषा सीखने की सलाह दे सकते हैं ? आपकी नज़र में हिन्दी न्यूज चैनल का कोई भी एक एंकर है जिनके बार…

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जानवरों की तरह न्यूजरूम से हांके गए दर्जनों मीडियाकर्मी

विनीत कुमार/ एबीपी न्यूज के आउटपुट हेड जो कि पिछले बीस साल से (स्टार न्यूज के दौर से ) चैनल को अपनी सेवाएं देते आए, उन्हें धकियाते हुए परिसर से बाहर किया गया. उनकी किताबें और बाक़ी चीज़ों को उनके साथ भेज दिया गया जिससे कि वो दोबारा किसी भी बहाने यहां आ न सकें. उन्हें अपने सहयोगिय…

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नामचीन के इंटरव्यू महज हैसियत जताने के माध्यम

अब इस विधा में कुछ बचा नहीं है.

विनीत कुमार/ चूंकि मुझे इतनी बात मालूम है कि किसी चैनल या डिजिटल प्लेटफॉर्म को किसी नामचीन चेहरे को इंटरव्यू के लिए तैयार करने में कितनी मशक्क़त करनी पड़ती है तो उसके पीछे का गुणा-गणित भी समझ आता है.…

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कुछ ही जातियों का वर्चस्व बड़े मीडिया समूहों में भी

उर्मिलेश/ अपने यहाँ के मीडिया-समूहों(बड़े अख़बारों और टीवी चैनलों में) में जाति और जातिवाद की बात चलती है तो अमूमन लोग कहते हैं, छोड़िये न जातिवाद कहाँ नहीं है, अपने समाज के हर क्षेत्र में है! लेकिन तुलनात्मक स्तर पर देखें तो जातिवाद का बड़ा ही हैरतंगेज़ चेहरा दिखाई देता है. सबसे अधि…

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लाशों का ढेर और शो में पूरे जोश के साथ स्वागत

अविनाश कुमार सिंह/ बालासोर रेल हादसा। २८८ लोगों की मौत। एक हजार से ज्यादा घायल। चीत्कार। चीख पुकार। बिलखते लोग। तबाही का मंजर। खौफनाक डरावनी तस्वीरें। हर तरफ खून के धब्बे। खून से सनी लाशें। जो अभी जिंदा थे, अभी अभी मर गए। पल पल दम तोड़ते लोग। हमने 'गदर' देखी। मुसाफिर जो…

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सम्पादक

डॉ. लीना