डॉ. लोकेन्द्र सिंह/ मीडिया प्राध्यापक एवं लेखक प्रो. संजय द्विवेदी की नई पुस्तक ‘संजय उवाच’ उनके चुनिंदा और सारगर्भित भाषणों का उत्कृष्ट संग्रह है। अकादमिक जगत से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्होंने जो व्याख्यान दिए, उनको पाठकों के लिए संपादित कर पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया है। ज्यादातर व्याख्यान मीडिया, भाषा और शिक्षा के मुद्दों पर केंद्रित हैं। इसलिए यह पुस्तक मीडिया के विद्यार्थियों एवं इस क्षेत्र में रुचि रखनेवालों को अवश्य ही पढ़नी चाहिए। जिस दौर में मीडिया को लेकर अनेक प्रकार की बहस…
अपने समय से संवाद का नाम है ‘संजय उवाच’
भारतीय विचार के मजबूत स्तंभ ‘11 महानायक’
डॉ. लोकेन्द्र सिंह / भारत में महापुरुषों की एक लंबी शृंखला है। भारत के सुदीर्घ इतिहास के प्रत्येक कालखंड में हमें ऐसे नायक दिखाई देते हैं, जिन्होंने भारतीय समाज का मार्ग प्रशस्त किया। ऐसे में कुछ नायकों को चुनना और उनके व्यक्तित्व पर लिखना, अत्यंत कठिन कार्य है। अपने लेखन के दौरान प्रो. संजय द्विवेदी समय-समय पर भारत के नायकों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर लिखते रहे हैं। उनमें से ही 11 नायकों का चयन करके उन्होंने एक पुस्तक तैयार की है, जिसका नाम है- ‘11 महानायक’। ‘संस्मय प्रकाशन’ से प्रकाशित पुस्त…
नवलकिशोर स्मृति आलोचना सम्मान के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित
30 मार्च 2026 तक प्रविष्टियां भेजी जा सकेंगी
दिल्ली। हिन्दी साहित्य और संस्कृति की पत्रिका बनास जन ने विख्यात आलोचक प्रो नवलकिशोर की स्मृति में आलोचना सम्मान के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की हैं। बनास जन द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि यह सम्मान प्रतिवर्ष गद्य साहित्य पर आलोचना अथवा वैचारिक आलोचना के लिए दिया जाएगा। इस सम्मान में प्रविष्टि के लिए आलोचक को लगभग 40000 (चालीस हजार शब्दों) का एतद विषयक आलेख भेजना होगा। आलेख मौलिक और अप्रकाशित अप्रसारित होना चाहिए। प्रविष्टि भेज रहे आवेदक की…
भाषा जोड़ती है, तोड़ती नहीं
11 दिसंबर भारतीय भाषा दिवस पर विशेष
डॉ. लोकेन्द्र सिंह/ जब कहीं से यह समाचार पढ़ने/ सुनने को मिलता है कि मराठी, तमिल, तेलगू या अन्य कोई भाषा नहीं बोलने के कारण व्यक्ति के साथ मारपीट कर दी गई, तो दु:ख होता है कि संकीर्ण राजनीति हमें किस दिशा में लेकर जा रही है। हम अपनी ही भाषाओं का सम्मान क्यों नहीं कर रहे हैं? जो भाषाएं आपस में जुड़ी हैं, उनके नाम पर हम एक-दूसरे से दूर क्यों हो रहे हैं? भारत की सभी भाषाओं के शब्द भंडार एक-दूसरे के शब्दों से समृद्ध हैं। हमें तो भाषायी विविधता का उत्सव मनाना चाहि…
विज्ञापन क्षेत्र का ‘अ से ज्ञ’ सिखाती है- विज्ञापन का जादू
मीडिया शिक्षक डॉ. आशीष द्विवेदी की पुस्तक है ‘विज्ञापन का जादू’
लोकेन्द्र सिंह/ मीडिया शिक्षक डॉ. आशीष द्विवेदी अपनी पुस्तक ‘विज्ञापन का जादू’ में लिखते हैं- “विज्ञापन की दुनिया बड़ी अनूठी और अजीब है। यदि हम इसको समझना चाहते हैं तो शुरुआती दौर से ही उसके अंदर झांकना होगा। जब तक हमारी विज्ञापन को लेकर सारी अवधारणाएं स्पष्ट नहीं हो जातीं, हम विषय की खोह में नहीं जा सकते”। यह सही बात है कि विज्ञापन की अवधारणा को समझना है, तब उसकी दुनिया के हर हिस्से से परिचित होना जरूरी है। डॉ. आशीष द्विवेदी ने …
साहित्यकारों ने राजभाषा पुरस्कारों की पद्धति पर उठाये सवाल
मुख्यमंत्री को पत्र लिख, 2023-24 के प्रदत्त पुरस्कार रद्द किये जाने सहित कई मांगें साहित्यकारों ने की
पटना/ अनंत/ 23 अगस्त को बिहार राजभाषा विभाग द्वारा दिये जाने वाले साहित्य सम्मान को लेकर विवाद छिड़ गया है। पुरस्कार घोषित किये जाने को लेकर विभाग सावधानी बरत रहा है, लेकिन जैसे ही दिनकर सम्मान दिये जाने की सूचना कवि/पत्रकार विमलकुमार को पत्र द्वारा प्राप्त हुआ उन्होंने यह पुरस्कार लौटाने का पत्र विभाग को भेजा और सोशल मीडिया पर जारी कर दिया।
इन पत्रों के आने के बाद पटना के साहित्यकारों ने …
डायबिटीज का इलाज गुलाब जामुन से संभव है!
इस चेतावनी से सजग करती प्रो मनोज कुमार की किताब "टारगेटेड जर्नलिज्म"
संजय सक्सेना/ नैतिक आचरण पर आधारित परिवार की अगली पीढ़ी अगर मूल्यविहीन हो जाये, तो जो पीड़ा घर के सबसे बड़े बुजुर्ग की होती हैं, उसी दर्द को महसूस करने का नाम है, प्रो मनोज कुमार की नई किताब "टारगेटेड जर्नलिज्म"।
यह किताब कल ही मेरे हाथ में आई है। लेखक एवं प्रोफेसर भाई मनोज कुमार से मेरा तीन दशक पुराना संबंध है। मैंने पत्रकारिता का ककहरा पहले दिन से इनके सानिध्य में बैठकर शुरू किया है। जब मैंने 1991 में पत्रकारिता में पहला …
मीडिया साहित्य की और रचनायेँ--
- एक बेहतरीन फोटो जर्नलिस्ट के साथ बेहतरीन इंसान भी
- पत्रकार उमेश उपाध्याय की स्मृति में 'मीडिया विमर्श' का अंक प्रकाशित
- मैं मीडिया हूँ
- पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का दस्तावेज है – ‘...लोगों का काम है कहना’
- तीन श्रेष्ठ कवियों की पत्रकारिता का आकलन
- लोकमंगल के संचारकर्ता हैं नारद
- Movies often show corrupt politicians
- शिवाजी के किलों की कहानी बताती है ‘हिन्दवी स्वराज्य दर्शन’
- सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही नफ़रत एक सुनियोजित षड़यंत्र ?
- लोकहृदय के प्रतिष्ठापक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
- रामसिंह की ट्रेनिंग
- कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना
- अलविदा फोटो जर्नलिस्ट राजीव
- पत्रकारों की असमय मृत्यु का राज़ !
- एक पत्रकार जो रिपोर्ट लिखने और लोगों की जान बचाते शहीद हो गया
नवीनतम ---
- कॉस्ट्यूम पत्रकारिता के दौर में साख की चिंता किसे है
- स्मृति कल्प का आयोजन 14 जून को
- अपने समय से संवाद का नाम है ‘संजय उवाच’
- पत्रकार या 'पत्थरकार'
- माना कि अंधेरा घना है, पर एक दीया जलाना कहाँ मना है!
- मिशन, बाजार और साख का संकट
- हिंदी पत्रकारिता निश्चित रूप से और आगे बढ़ेगी
- हिन्दी पत्रकारिता यानि तीन सदी की जनसंचारीय यात्रा
- संघर्ष, चेतना और जनसरोकारों की गौरवगाथा
- खबर से एजेंडा तक: जब हिंदी पत्रकारिता ने बदली अपनी राह
- आईआईएमसी ने एआई अकादमी का शुभारंभ किया
- पत्रकार राजेश अवस्थी की खुदकुशी और रिटायर पत्रकारों की हालत
- मीडिया : हमको आईना दिखाना है, दिखा देते हैं
- विश्वसनीयता के लिए "विराम नियम" अपनाने की आवश्यकता
- भारतीय मीडिया की बड़ी होती दुनिया!
- महंगा होता जीवन सस्ता होता लेखन
- लोकमंगल के लिए था देवर्षि नारद का संवाद : प्रो. संजय द्विवेदी
- हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष पर मीडिया महाकुंभ 8 मई से
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foo barMarch 2, 2025
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रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
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पंकज चौधरीDecember 17, 2024
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Anurag yadavJanuary 11, 2024
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सुरेश जगन्नाथ पाटीलSeptember 16, 2023
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Dr kishre kumar singhAugust 20, 2023
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Manjeet SinghJune 23, 2023
सम्पादक
डॉ. लीना
