मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts February 2013

839 नए एफएम चैनल

एक लाख से अधिक आबादी वाले सभी शहरों में निजी एफएम रेडियो

आज लोकसभा में वित्‍त मंत्री श्री पी चिदंबरम ने वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का 294 और शहरों में निजी एफएम रेडियो की सेवाएं पहुंचा…

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दोनों चला दो, कोई एक जानकारी तो सही होगी!

जगमोहन फुटेला/ आज चंडीगढ़ से चलने वाले एक टीवी चैनल 'डे एंड नाईट' पर लिखा आ रहा था कि Blow to Ramdev उसी ग्राफिक में नीचे था कि सरकार को (रामदेव के भवन का) ढांचा न गिराने का आदेश। मैं सोचता रहा कि ये कैसे हो सकता है? अगर हाईकोर्ट ने झटका दिया है तो रामदेव का संस्थान सरकार से ब…

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बांग्लादेश के हालात पर भारतीय मीडिया की खामोशी

डा. देवाशीष बोस / बांग्लादेश  में हो रहे जन जागरण आन्दोलन को भारत की मीडिया नजरअंदाज कर रही है। जबकि नेपाल के जनयुद्ध, श्रीलंका का तमिल आन्दोलन, पाकिस्तान का आतंकी अभियान तथा वर्मा का सैन्यीकरण को भारतीय मीडिया ने महत्वपूर्ण स्थान दिया था। आस पास की गतिविधियों को गौर किये बगै…

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पत्रकारिता कोश का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में

आफताब आलम द्वारा संपादित इस कोश का 13 वर्षों से नियमित प्रकाशन

मुंबई। भारत की प्रथम मीडिया डायरेक्टरी "पत्रकारिता कोश" का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। हाल ही में लिम्का बु…

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गजलकार वसन्त की स्मृति में ‘ एक शाम कवयित्री शांति यादव के नाम’

चिडि़या ठगी, उदास शहर में /बाज हुए लो खास, शहर में।‘वो जो भेजे गए थे वतन के लिए /उनकी जद्दोजहद है कफ़न के लिए। इस महान राष्ट्र का अधिक…

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मीडिया सेंसरशिप है एमपी में काटजू साहेब!

वेबसाइटों और चैनलों पर योजनाओं की जानकारी से ज्यादा सरकार की गान गाथा सरकारी खर्च पर गाई जा रही है !

आदित्य नारायण उपाध्याय…

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कांगाल मालसाट को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं​​

स्टालिन के असम्मान और सिंगुर की चर्चा का बहाना​​ !
​​सेंसर बोर्ड के लोगों के तृणमूल कांग्रेस और दीदी से बेहतर ताल्लुकात है वजह !…

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धाराशायी हो रहे मीडियाई सैनिक

पत्रकारों का फेसबुक वाला अंदाज उनके माध्यम में नहीं

विकास कुमार गुप्ता/भारतीय मीडिया का समग्र ढांचा कहीं न कहीं पाश्चात्य मीडिया के अनुसरण पर आधारित है। इतिहास गवाह है, मीडिया शब्द …

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काटजू ने 'क्यों कहा’ से ज़रूरी है उन्होंने 'क्या कहा’

तनवीर जाफरी/ प्रेस कौंसिल आफ इंडिया के वर्तमान अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू आमतौर पर अपनी स्पष्टवादिता तथा बेलाग-लपेट के की जाने वाली टिप्पणियों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। न्यायाधीश रहते हुए भी उनकी कई टिप्पणीयां व कई ऐसे निर्णय सा…

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क्योंकि इससे किसी को कोई लाभ नहीं !

इर्शादुल हक। बिहार में नक्सली हमले में सात बीएमपी जवान की शहादत कभी कानफाडू शोर मचाने वाला मीडिया बड़ी खबर नहीं बनायेगा. वह इसे आतंकवाद नहीं कहेगा. आतंकवाद तो वही घटना, इनकी नजर में होगी जो महानगरों, शहरों में विस्फोट हो.…

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शिंदे और जैल सिंह दोनो को दलित बताकर कोसा दैनिक भास्कर ने

संजीव खुदशाह का पत्र राजदीप सरदेसाई के नाम

मिस्टर राजदीप सरदेसाईजी, आईबीएन 18 नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ  
आज आपका लेख दैनिक भास्कर में पढ…

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निःशक्तजनों से संबंधित घटनाओं के बजाय मुद्दों को उठाए मीडिया

संबंधित एक्ट की स्थिति बिहार में चिंताजनक : पिंचा

पटना। मीडिया ने विकलांगों की आवाज को हमेशा बुलंद किया है लेकिन इवेंट अर्थात् घटनाओं पर आधारित नहीं इशू अर्थात् उनके मुद्ददों-मसलों को लेकर सपोर्ट करे तो बेहतर …

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साहित्य व शिष्टता से दूर होती पत्रकारिता

निर्मल रानी/ आधुनिकता के वर्तमान दौर में परिवर्तन की एक व्यापक बयार चलती देखी जा रही है। खान-पान, पहनावा,रहन-सहन,सोच-फिक्र, शिष्टाचार, पढ़ाई-लिखाई, रिश्ते-नाते, अच्छे-बुरे की परिभाषा आदि सबकुछ परिवर्तित होते देखा जा रहा है। ज़ाहिर है पत्रकारिता जैसा  जिम्मेदारीभरा पेशा भी इस पर…

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गणेशशंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब ने मनाया स्वतंत्रता सेनानी राजा प्रताप सिंह का जन्मदिन

नौगाव (छतरपुर )। भारत देश के वीर सपूत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व विधायक श्री प्रताप सिंह (नन्हेराजा) के 95 वे जन्म दिवस पर उनके निवास बंगला नं0 60 पिपरी नौगाव में गणेशशंकर विद्यार्थी प्रेस क्लब की ओर से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें नौगाव नगर के व्यापारियो…

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अलगाव की संस्कृति के बरक्स कुछ सार्थक भी सोचे : अशोक जमनानी

अपनी माटी के तीन वर्ष पूरे होने पर उदयपुर में संगोष्ठी

उदयपुर। संस्कृतियाँ नदियों के किनारे फलती फूलती है लेकिन राजस्थान में मांगनियार संस्कृति जैसलमेर के रेतीले मरुस्थल में फली फूली है। आज के दौर मे…

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भैया आप इतने चुप क्यों रहते हो?

प कुछ भी लिखिए, मगर उससे आय होनी चाहिए!

रमेश प्रताप सिंह पहले किसी समाचार की गुणवत्ता देखने के लिए उसको सह संपादक के बाद संपादक की पैनी नज़रों से गुजरना पड़ता था। जहां उसके गूढ़ अर्थों और उसके प्रभाव के साथ ही…

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पटना प्रलेस का पुस्तक विमर्श आयोजन

इस शहर के लोग’ साहित्य जगत के लिए नायाब तोहफा..

रविवार को पटना प्रगतिशील लेखक संघ ने स्थानीय ’केदार भवन’ में ‘इस शहर के लोग’  (कविता संग्रह) और कवि मानिक बच्छावत की रचनात्मकता पर विमर्श अयोजित किया। विमर्श में मानिक बच्छावत क…

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सरकारी वेबसाइटे अंग्रेजी की शोभा बढ़ा रही है !

विकास कुमार गुप्ता/हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। लेकिन हमारी जनता आजाद गुलाम की मानिंद जिन्दगी बसर करने मजबूर है। और यह सब हमारी सरकार की कुनीतियों एवं अनदेखी का परिणाम है। हमारे थाने अंग्रेजों के समय के थानों से भी खतरनाक है वो इसलिए क्योंकि अंग्रेजों की लाठ…

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पत्रकार असंगठित मजदूरों से भी गये बीते!

कभी सुना है कि प्रेस क्लब की कोई टीम श्रमायुक्त अथवा श्रम मंत्री से मिला हो ?

रमेश प्रताप सिंह / जो कार पर है वो पत्रकार नहीं हैं और जो पत्रकार है उसके…

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समागम का फरवरी अंक भारतीय सिनेमा के सौ साल पर

विशेष अंक के अतिथि सम्पादक हैं वरिष्ठ फिल्म समीक्षक श्री सुनील मिश्र

भारतीय सिनेमा ने अपने सौ साल पूरे कर लिये हैं. यह अवसर न केवल भारतवर्ष बल्कि समूची दुनिया के लिये अविस्मरणीय समय है…

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