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"मेरे मेहबूब" की साधना का निधन

बालों का "साधना"  कट मशहूर था 

मुंबई। अपनी जीवंत अदाकारी के लिए जानी जाने वाली बीते जमाने की मशहूर अभिनेत्री साधना का शुक्रवार को मुंबई के एक अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह 74 साल की थीं । वह कुछ समय से बीमार थीं। पिछले साल ही उनकी सर्जरी हुई थी। वह मुंह के कैंसर से पीड़ित थीं।

2 सितंबर, 1941 को कराची में जन्मीं साधना ने 22 साल के करियर में 35 फिल्में की थीं। 1960 और 1970 के बीच वे बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में शुमार थीं। वह राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ के गीत‘मुड़-मुड़ के ना देख’ में कोरस गर्ल के रूप में पहली बार हिन्दी सिनेमा में नजर आयी थीं। इसके अलावा "वो कौन थी, मेरा साया, मेरे मेहबूब, आरजू, राजकुमार, लव इन शिमला, एक मुसाफिर-एक हसीना, असली- नकली" जैसी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया था। 

साधना का पूरा नाम "साधना शिवदासानी" था । वे अपने माता - पिता की इकलौती संतान थीं।  देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार कराची छोड़कर मुंबई आ गया। साधना का नाम उनके पिता ने अपनी पसंदीदा अभिनेत्री साधना बोस के नाम पर रखा था। उन्होंने 14 साल की उम्र में देश की पहली सिंधी फिल्म 'अबाना' में काम करके करिअर शुरू किया था। 
साधना की खास स्टाइल को 'रोम हॉलिडे' नाम की अंग्रेजी फिल्म के किरदार ऑद्रे के लुक से मोटिवेट था। साधना ने अपने चौड़े माथे को कवर करने के लिए यह स्टाइल अपनाया ताकि उनके बाल माथे पर रहें। ये स्टाइल इतना पॉपुलर हुआ कि 60 के दशक में हर लड़की साधना कट जैसे बाल रखने लगी। लड़कियों में चूड़ीदार सलवार कमीज़ पहनने के ट्रेंड साधना ने शुरू किया था। हल्के रंग के शरारा, गरारा और कानों में बड़े झुमके, बाली  उनकी खास पहचान रही। दिसंबर 2014 में उनके मुंह की मुंबई में ही सर्जरी हुई थी। पब्लिक अपीयरेंस से बचने वाली साधना मई 2014 में एक्टर रणबीर कपूर के साथ रैम्प करती नजर आई थीं।

यह उनकी लाइफ का पहला और आखिरी रैम्प वॉक था।इस फैशन शो को एड्स और कैंसर अवेयरनेस के लिए ऑर्गेनाइज किया गया था।

मीडियामोरचा परिवार की ओर से श्रद्धांजलि।

साकिब ज़िया की रिपोर्ट 

 

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना