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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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नई शिक्षा नीति का 60% हिस्सा शिक्षक ही लागू करने में सक्षम

पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

भोपाल/ नीति आयोग भारत सरकार, भारतीय शिक्षण मंडल एवं पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की पहल करते हुए राष्ट्रीय संगोष्ठी प्रारंभ की गई है। सोमवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय परिसर में इस संगोष्ठी के पहले दिन जेएनयू प्रोफेसर मजहर आसिफ ने विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की।

इस अवसर पर प्रो. आसिफ ने कहा कि देश में लागू की गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश में पहली ऐसी शिक्षा नीति है जिसमें भारतीयता की खुशबू है, यह भारतीयता के बोध और भारत की आवश्कताओं को पूर्ण करने वाली शिक्षा नीति है जिसे लागू किया जाना ज़रूरी है।

शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर मार्गदर्शन देते हुए प्रो. आसिफ ने बताया कि मातृभाषा, स्थानीय ज्ञान और कौशल पर केंद्रित इस नीति का 60% हिस्सा तो केवल शिक्षक ही लागू करने में सक्षम हैं, इसलिए इसके क्रियान्वयन में शिक्षकों की महत्ता सरकार से अधिक है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.जी. सुरेश ने कहा कि विश्वविद्यालय मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में निश्चित रूप से उत्कृष्टता को प्राप्त करेगा। उन्होने शिक्षकों से कहा कि आप समय सीमा में नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन करते हुए विश्वविद्यालय को ट्रेंड सेटर बनाइए।

परस्पर संवादात्मक संगोष्ठी के पहले दिन में शिक्षकों ने प्रोफ़ेसर आसिफ के साथ शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में व्यावहारिक पहलू और प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. सी.पी. अग्रवाल ने स्वागत भाषण एवं, कुलसचिव प्रो. अविनाश वाजपेयी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. पवन मलिक ने किया।

मंगलवार को संगोष्ठी के दूसरे दिन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, नीति आयोग और भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा आयोजित “राष्ट्रीय शिक्षा नीति और क्रियान्वयन” पर म.प्र. के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया, साथ ही शिक्षाविद् श्री उमाशंकर पचौरी का विशेष व्याख्यान हुआ।

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना