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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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विश्व पुस्तक दिवस आयोजित

दो पुस्तकों का लोकार्पण व भाषण प्रतियोगिता संपन्न

मुसलमानों की संस्कृति भारतीय संस्कृति से अलग नहीं है - प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह

छतरपुर /‘‘हमारे इतिहास को पहले से ही विकृत ढंग से पढाया जाता है, मध्यकालीन इतिहास में कहा जाता है कि भारत पर मुसलानों का आक्रमण, लेकिन आधुनिक इतिहास में यह नहीं पढाते कि ईसाईयों का आक्रमण, उसे ब्रितानी दखल पढ़ाया जाता हे। अंगे्रज पहले से ही ऐसा इतिहास लिखवाते और पढ़ाते रहे हैं ताकि भारत में सांप्रदायिक विभाजन बना रहे। मुस्लिम संस्कृति भारत की संस्कृति से कतई अलग नहीं है।’’  प्रख्यात लेखक व जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली  में हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो अब्दुल बिस्मिल्लाह ने यह उदगार स्थानीय गांधी आश्रम में आयोजित विश्व पुस्तक दिवस समारोह में व्यक्त किए। इस कार्यक्रम में जिले के कलेक्टर राजेश बहुगुणा विशेष तौर पर उपस्थित थे। 23 अप्रैल, विश्व पुस्तक एवं कापीराईट दिवस के अवसर पर भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्था नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने प्रगतिशील लेखक मंच, गांधी आश्रम के सहयोग से समूचे मध्यप्रदेश में केवल छतरपुर में ही अपने कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसके तहत सुबह छात्रों के लिए भाशण प्रतियोगिता तथा शाम को पुस्तक लोकार्पण व विमर्श का आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर जानेमाने साहित्यकार अब्दुल बिस्मिल्लाह, नई दिल्ली व अशोक कुमार पांडे, ग्वालियर से पधारे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डा. गंगाप्रसाद बरसैया ने की । इस अवसर पर एक पुस्तक प्रदर्शिनी भी लगाई गई थी।

स्थानीय गांधी आश्रम में संपन्न भाषन प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे - कनिष्ठ संवर्ग - रोहित निर्मल(प्रथम), चिरायु असाटी(द्वितीय), दिव्या भारती(तृतीय), शशि मिश्र , सृजन मिश्र(सांत्वना)। वरिष्ठ संवर्ग - सुभाश श्रीवास्तव(प्रथम), अदिति सिंह(द्वितीय), वंषिका असाटी(तृतीय), नौषीन और आत्री गोस्वामी(सांत्वना)। सभी पुरस्कृत बच्चों को जिलाधीष राजेष बहुगुणा और प्रो.अब्दुल बिस्मिल्लाह के हाथों प्रमाण पत्र व नगद राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई। इस प्रतियोगिता का परिचय पंकज चतुर्वेदी ने दिया, कार्यक्रम का संचालन उपेन्द्र सिंह ने किया और आभार प्रदर्शन प्रो बहादुर सिंह परमार ने किया।

इसे पूर्व नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा हाल ही में प्रकाशित पुस्तक आजादी का आंदोलन और भारतीय मुसलमान, जो शांतिमय रे द्वारा लिखित मूल अंग्रेजी पुस्तक , FREEDOM MOVEMENT AND INDIAN MUSLIMS का हिंदी अनुवाद है, का विमोचन हुआ। इसके अलावा डा. गंगाप्रसाद बरसैया की पुस्तक ‘‘संवाद साहित्यकारों से’’ प्रकाषक  साहित्य निकेतन, बिजनौर  का भी विमोचन किया गया। प्रो बहादुर सिंह परमार ने डा बरसैया की पुस्तक की समीक्षा करते हुए बताया कि इस पुस्तक में 83 रचनाकरों के पत्र हैं जो अपने समय के समाज, निजता, आदि पर विमर्श करते हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री अब्दुल बिसमिल्लाह ने कहा गालिब से ले कर आधुनिक इतिहास तक के कई किस्सों के माध्यम से बताया कि आजादी का आंदोलन में कई मुस्लिम और हिंदू अगंरेजपरस्त थे और उनसे ज्यादा लोग देशभक्त थे। ऐसे में किसी समाज-जाति को सवालों में खड़ा करना हमारी भूल होगा। ’’ पुस्तक के अनुवादक अषोक कुमार पांडे ने कहा कि इतिहासविदों ने हमारी संघर्ष गाथाओं को कभी निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत नहीं किया - जहां रानी लक्ष्मीबाई का गुणगान सभी जगह होता है, वहीं उसी काल में आजादी के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाली बेगम हजरत महल का नाम तक लोग नहीं जानते।

जिलाधीश राजेश बहुगुणा ने नेशनल बुक ट्रस्ट के प्रकाशनों और पुस्तकों के प्रौन्नयन के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आजादी का आंदोलन एक जन आंदोलन था और कोई भी जन आंदोलन किसी संप्रदाय विशेष का हो ही नहीं सकता, उसमें समाज के सभी वर्गों की समान भागीदारी होती है, तभी वह जन आंदोलन होता है। श्री बहुगुण ने कई साहित्यिक कृतियों का उल्लेख अपने वक्तव्य में करते हुए युवाओं से अपील की  कि वे अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़े और समाज के प्रति अपनी स्वतंत्र धारणा बनाएं।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए नेशनल बुक ट्रस्ट के संपादक पंकज चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि नेबुट किस तरह पूरे देश में पुस्तक प्रौन्नयन के लिए अभिनव प्रयोग कर रहा है।  कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो बरसैया ने अपने उदबोधन में कहा कि इतिहास का पूर्वागृह मानसिकता के साथ विष्लेशण करने से सामज पर विकृत असर पड़ रहा है। उनहोंने कहा कि अभी तक छतरपुर जिले के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास पर कोई निष्पक्ष काम नहीं हुआ।

प्र.ले.स के अध्यक्ष एनपी सिंह ने ने सभी पुस्तक प्रेमियों, बच्चों और गांधी आश्रम के प्रति आभर व्यक्त किया। इस अवसर पर गांधी आश्रम, नेषनल बुक ट्रस्ट और  गांधी आश्रम की पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई गई।

 

 

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सम्पादक

डॉ. लीना