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महिलाएं स्वयं सम्मान हासिल करने में सक्षम : रेवती रमण सिंह

समाज में स्त्री की विशेष भूमिका : प्रो. संजय द्विवेदी, 'मांई समिट 2021' का आयोजन

नई दिल्ली। कमला ग्राम विकास संस्थान, माता ललिता देवी सेवा श्रम तथा भोजपुरी विकास एवं शोध संस्थान द्वारा आयोजित 'मांई समिट 2021' का आयोजन मंगलवार को भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) में किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद रेवती रमण सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। समारोह की अध्यक्षता आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने की। कार्यक्रम में हास्य कवि एवं पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध व्यंग्यकार सुरेंद्र शर्मा विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद थे। इसके अलावा फिजी दूतावास के काउंसलर नीलेश रोनील कुमार, आयकर विभाग की ज्वाइंट कमिश्नर अमनप्रीत, आईएएस ईरा सिंघल, कोरोना वैक्सीन के शोध कार्य से जुड़े हुए प्रो. संजय राय एवं बाल अधिकार कार्यकर्ता भारती अली भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस अवसर पर 'नारी एवं समाज' विषय पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद रेवती रमण सिंह ने कहा कि आज लड़कियां शिक्षा प्राप्त कर हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं। महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया जिस तरह बदला है, उसे देखकर यह पूरी उम्मीद है कि आने वाला कल स्वर्णिम होगा। उन्होंने कहा कि आज की नारी स्वयं सम्मान हासिल करने में सक्षम है, किसी को उसे सम्मान दिलाने की आवश्यकता नहीं है।

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि समाज में स्त्री की विशेष भूमिका है। किसी भी सभ्य समाज का निर्माण उस देश के शिक्षित नागरिकों द्वारा किया जाता है और नारी इस कड़ी का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि स्त्री 'शक्ति' का ही एक रूप है। हमारी संस्कृति में कन्या पूजन का महत्व है। दुनिया को सुंदर बनाने के लिए महिलाओं ने बहुत कुछ किया है, लेकिन आज हमें यह सोचने की आवश्यकता है कि हमने महिलाओं के लिए क्या किया।

प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि आज भारतीय नारी अपने लक्ष्य तय कर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एक पुरुष और महिला में यह अंतर है कि स्त्री के दिमाग में भी दिल होता है और पुरुष के दिल में भी दिमाग होता है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी ईरा सिंघल ने कहा कि एक लड़की वो सब कुछ कर सकती है, जो वो सोचती है। हमारे समाज में लड़कियों को यह सिखाया जाता है कि वे अपने बारे में न सोचकर दूसरों के बारे में ज्यादा सोचती हैं। अब इस धारणा को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं अपने लिए ख्वाब देखती हैं, तो दुनिया उनके लिए सपने देखना शुरू करती है। 

प्रो. संजय राय ने कहा कि सभी महिलाओं की अपनी विशेषता होती है और इस विशेषता के कारण ही समाज में उनका सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। कोरोना महामारी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कोविड सिर्फ एक बीमारी है, लेकिन हमने उसे संकट में बदल दिया है और हमारे देश के वैज्ञानिक इस संकट का सामना बेहद मजबूती से कर रहे हैं। 

इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें भारती अली, अमनप्रतीत, डॉ. मालविका हरिओम, शुप्रिया द्विवेदी, एकता मिश्रा, डॉ. पूजा कौशिक, पूनम राय, डॉ. रेखा मेहरा, सोना चौधरी, राजश्री राय, रश्मि मिश्रा, डॉ. अनु सिन्हा, राजेश्वरी त्यागराजन, डॉ. नीतू कुमार नूतन, सुभाष राठी, डॉ. कल्याणी कबीर, किरण सेठी, कुमकुम भारद्वाज एवं ईरा सिंघल शामिल हैं। इस मौके पर डॉ. पूजा कौशिक की दो पुस्तकों 'वृंद का काव्य' और 'कहता है दिल' का भी लोकार्पण किया गया। 

कार्यक्रम का संचालन विजय बहादुर सिंह ने किया एवं आभार प्रदर्शन कार्यक्रम के संयोजक अजीत सिंह ने किया।

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सम्पादक

डॉ. लीना