Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

बिहार में खुलेगी "कीस" की शाखा

दुनिया का सबसे बड़ा आवासीय आदिवासी बच्चों की संस्था होने का गौरव प्राप्त है कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस को

साकिब ज़िया/पटना। कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस यानी "किस" जिसे दुनिया का सबसे बड़ा आवासीय आदिवासी बच्चों की संस्था होने का गौरव प्राप्त है। इसने अब बिहार में भी अपना विस्तार करने का मन बनाया है। इसमें किंडर गार्डन से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक की शिक्षा के साथ खेलकूद के अलावा कौशल विकास की शिक्षा मुहैया कराई जाएगी। इसके तहत बच्चों को अपना जीवीको पार्जन कर सके ऐसा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस संबंध में संस्था के संस्थापक डॉ.अच्यूता सामंता ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की है।

पटना में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होने बताया कि सरकार ने इस कार्ययोजना की सराहना की है और यह आश्वसत किया है संस्था को हर संभव सहायता दी जाएगी। संस्था के संस्थापक ने यह भी बताया कि इससे बिहार के आदिवासी समूह समेत समाज के निचले तबके और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा और कौशल विकास के प्रशिक्षण के लिए एक बेहतर विकल्प मिल सकेगा। पहले से ही संस्था के ऐसे प्रयास से समाज के भीतर से गरीबी को मिटाने और ऐसे बच्चों को मुख्यधारा में शामिल किये जाने में यह कदम काफी उपयोगी साबित हो रहा है। हाल ही में कीस को संयुक्त राष्ट्र से कंस्लटेटिव स्टेटस का दर्जा हासिल प्राप्त हुआ है। यह संस्था झारखंड, और छत्तीसगढ़ में भी काम शुरू करने जा रही है। वहीं मध्यप्रदेश में कार्ययोजना शुरू हो चुकी है, जबकि दिल्ली सरकार के सहयोग से दिल्ली में सुचारु रूप से काम कर रही है।

बिहार में ऐसे संस्थानों के खुल जाने से गरीब और आदिवासी समाज के लोगों को काफी मदद मिल सकेगी जो आर्थिक रूप से भी कमजोर हैं।

साकिब ज़िया मीडियामोरचा के ब्यूरोचीफ़ हैं।

Go Back

Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;cff38901a92ab320d4e4d127646582daa6fece06175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;c1ebe705c563d9355a96600af90f2e1cfdf6376b175;250;911552ca3470227404da93505e63ae3c95dd56dc175;250;752583747c426bd51be54809f98c69c3528f1038175;250;ed9c8dbad8ad7c9fe8d008636b633855ff50ea2c175;250;969799be449e2055f65c603896fb29f738656784175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना