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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पत्रकारों के हक के लिए हमेशा लड़ता रहेगा डबल्यूजेएआई

पटना/ आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पटना इकाई ने पटना के वन मॉल मे एक संगोष्ठी का आयोजन किया , इस संगोष्ठी की अध्यक्षता बाल कृष्ण ने की , इस मौके पर पटना इकाई के कई पदाधिकारी , और सदस्यों ने हिस्सा लिया और सबने प्रेस की स्वतंत्रता एंव जिम्मेदारियों पर विशेष चर्चा की ।

पटना इकाई के अध्यक्ष बालकृष्ण ने प्रेस दिवस पर चर्चा करते हुए बताया कि प्रेस कौंसिल को 1966 में प्रेस के हितों की रक्षा व उन्हें मर्यादित करने के लिए गठित किया गया था। चूँकि 16 नवंबर से उसने काम करना शुरू किया था। इसलिए इस दिन को राष्ट्रीय प्रेस दिवस घोषित कर दिया। इसके अध्यक्ष अमूमन सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज होते हैं।

वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद कौशल के विशेष निर्देशन मे आयोजित इस संगोष्ठी मे कई वक्ताओं ने अपनी बाते रखीं, पटना इकाई के उपाध्यक्ष इंद्रमोहन पांडे ने कहा कि मीडिया को समाज का दर्पण माना जाता है , लेकिन आज मिडिया का रूप परिवर्तित हो चुका है।लोग खबरों को मसालेदार बनाने की फिराक मे लगे रहते है और असली तथ्यों से किनारा कर लेते हैं ,  हालाँकि आज भी बहुत से ऐसे पत्रकार हैं जो निडर होकर हकीकत ब्यां करते हैं और भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ अपनी लेखनी और मजबूत करते हैं।

वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पटना इकाई के संगठन प्रभारी सुजीत गुप्ता ने अपने वक्तव्य मे कहा कि आज के दौर मे प्रिंट ,इलेक्ट्रोनिक मीडिया की भीड़ मे वेब मीडिया को अपनी अलग पहचान बनाने की जरूरत है | वेब मीडिया एक ऐसा ही प्लैटफ़ार्म है जिसके जरिए हम आम अवाम तक आसानी से पहुँच सकते हैं , हम जानते हैं कि आज की तारीख में देश में जितने एँड्रायड फोन धारक हैं , नेट तथा सोशल मीडिया का उपभोग करते हैं, उनके करीब हमे पहुँचने मे हमे ज्यादा वक्त नहीं लगेगा |

संयुक्त सचिव सुरज कुमार ने कहा कि आज की तारीख में पत्रकारों की नौकरी बहुत जोखिम भरा  है वे कल किस वक्त निकाल बाहर कर दिए जाएं इसका पता नहीं। अपनी खबरों से दूसरों के शोषण की बात करने वाला खुद कितना शोषित है इसका जिक्र तक नहीं कर सकता। बड़े मीडिया घरानो में इस बात की मनाही है कि वह पत्रकारों की यूनियन से नहीं जुड़ेगा, लेकिन वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया इस महत्वपूर्ण और गंभीर मामलों को लेकर एक विस्तृत और गहरी सोच के साथ काम कर रहा है और पत्रकारों के हक के लिए हमेशा लड़ता रहेगा |

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना