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'द न्यू यॉर्क टाइम्स' के कार्टून से भारत के प्रति अमेरिकी नजरिये का खुलासा

गौरतलब है कि यह माफीनामा भारत सरकार, भारतीय जनता को संबोधित तो है ही नहीं

पलाश विश्वास / हंगामा है बरपा।आखिरकार एक माफीनामा अमेरिका से हासिल हो गया। हमारे संघी मित्र इस पर इतरा ही सकते हैं कि पाकिस्तान और चीन को सबक सिखाने की तर्ज पर उनकी सरकार ने अमेरिका को भी झुका दिया और कोई अचरज नहीं कि चालू विधानसभा चुनाव अभियान में इस माहन उपलब्धि का भी यथासंभव नकदीकरण हो जाये।

गौरतलब है कि अखबार के अनुसार कार्टूनिस्ट हेंग किम सांग ने अपने इस कार्टून के जरिए यह दिखाने की कोशिश की थी कि अंतरिक्ष में संभावनाएं तलाशना अब सिर्फ अमीर या पश्चिमी देशों का विशेषाधिकार नहीं है।

गौरतलब है कि हेंग सिंगापुर के रहने वाले हैं ,विशुद्ध अमेरिकी नहीं और उनके बारे में मशहूर है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए वो अपने उत्तेजक तस्वीरों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद अ़खबार ने उन पाठकों से माफी मांगी है जो कार्टून में इस्तेमाल की गई तस्वीरों से नाराज हैं।

गौरतलब है कि यह माफीनामा भारत सरकार,भारतीय जनता को संबोधित तो है ही नहीं। अपने एशियाई कार्टूनिस्ट के कार्टून के लिए माफी न अमेरिकी की शर्म है न अमेरिकी अखबार की शर्म है और न इससे सर्वव्यापी अमेरिकी वर्चस्व को कोई आंच आने वाली है।

अंध राष्ट्रवादियों केलिए बहरहाल यह खुशी का मौका है।

भारत का सत्ता तबका भारत को अमेरिका बनाने के लिए बेहद जल्द बाजी से पिछले तेइस साल से आर्थिक सुधारों के मार्फत देश के अमेरिकीकरण को अंजाम दे रहा है।अमेरिकी नजरिये से उभरते हुए बाजार बतौर मुक्त बाजार बंदोबस्त में भारत अब भी वही सांपों और जादूगरों का देश है।

मोदी अपना माउस दिखाने के राकस्टार करतब से या वाशिंगटन पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा के साथ अभूतपूर्व साझा संपादकीय लिखकर इस नजरिये को बदल पाये हैं,इस कार्टून प्रकरण से कमस कम ऐसा नहीं लगता।

वाशिंगटन पोस्ट का प्रतिद्वंदी अखबार 'द न्यू यॉर्क टाइम्स' की उस साझा संपादकीय पर तिलमिलाहट समझकर चाहे तो आप इस मामले को खारिज समझ सकते हैं।

मुद्दे की बात तो यह है कि भारत की संपूर्ण वित्तीय व्यवस्था,राजकाज और नागरिकों के निजी जीवन की गोपनीयता,निजता परइस वक्त अमेरिकी नियंत्रण है और निगरानी है.इसके सबूत असांज के खुलासे से बहुत पहले हो चुका है।पश्चिमी देशों की निगरानी के लिए अमेरिका को पछतावा जताना पड़ा,लेकिन भारत के साथ किये पर न अमेरिका को शर्म है और न भारत के सत्ता वर्ग को।बहरहाल एक नकचढ़े अमेरिकी अखबार में प्रकाशित कार्टून के लिए क्षमायाचना जले पर नमक के छिड़काव जैसा होने के बावजूद आयातित सुगंध जरुर है जो सड़ांध के अहसास को भी खत्म कर सकता है।

बहरहाल खबर यह है कि अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में गिने जाने वाले 'द न्यू यॉर्क टाइम्स' ने अपने उस कार्टून के लिए माफी मांगी है जिसमें कथित तौर पर भारत के मंगलयान अभियान का मजाक उड़ाया गया था। समाचार पत्र ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है कि बहुत सारे पाठकों ने 'न्यू यॉर्क टाइम्स इंटरनैशनल' में छपे उस संपादकीय कार्टून की शिकायत की है जो भारत के अंतरिक्ष में सशक्त प्रयासों पर बनाया गया था।

हम तो लगातार लिखते रहे हैं कि कृत्तिम उपग्रह तंत्र से सूचना तकनीक जुड़ जाने से हम विश्वव्यापी सूचना विस्फोट के हिस्सेदारजरुर हो गये हैं,लेकिन भारत का यह अंतरिक्ष कार्यक्रम सीधे तौर पर व्हाइट हाउस, पेंटागन, नाटो और नासा के साथ नत्थी है।

इसी सिलसिले में सझें कि क्यों इस कार्टून में भारत के मंगलयान अभियान का मखौल उड़ाया गया। कुछ पाठकों द्वारा इसका विरोध किए जाने के बाद अ़खबार ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है कि बहुत सारे  पाठकों ने न्यूयॉर्क टाइम्स इंटरनेशनल में प्रकाशित उस संपादकीय कार्टून की शिकायत की है जो भारत के अंतरिक्ष में बढ़ते मजबूत कदमों पर आधारित था।

अखबार ने सफाई दी है कि कार्टूनिस्ट हेंग अपने कार्टून से किसी भी तरह से भारत, देश की सरकार या यहां के नागरिकों को खारिज नहीं करना चाहते थे। उल्लेखनीय है कि न्यूयॉर्वâ टाइम्स में एक कार्टून छपा था जिसमें दिखाया गया था कि मंगल पर पहले से ही पहुंच चुके एलीट स्पेस क्लब के लोग अ़खबार में भारत के पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुंचने की अखबर पढ़ रहे हैं और भारत का प्रतिनिधि उनके कमरे के बाहर गाय के साथ खड़ा होकर दरवाजा खटखटा रहा है।

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सम्पादक

डॉ. लीना