Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

सोशल मीडिया पर हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता

साकिब ज़िया। संवाद बनाए रखने के लिए, रिश्तों में रोमांच सजाए रखने के लिए और अनुभूतियों में ताजगी बनाए रखने के लिए आज सोशल मीडिया सबसे पसंदीदा विकल्प है। आंकड़ों का यह सच रोमांच और अचरज से भरा है कि व्हाट्सएप पर प्रत्येक सेकंड में करीब, 2,50,000 संदेश भेजे जाते हैं उनमें हिन्दी के संदेश दूसरे स्थान पर हैं। हमें गर्व है कि हिन्दी यहां अन्य भाषाओं के कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है। अब सभी सोशल मीडिया पर हिन्दी में लिखना इतना आसान हो गया है कि केवल वेब ब्राउज़र पर एक टूल इंस्टॉल करने मात्र से उयपोगकर्ता हिन्दी टाइप करने में माहिर हो सकते हैं।

ट्विटर ने हिन्दी उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए और अपनी लोकप्रियता का विस्तार करने के लिए हिन्दी के हैशटैग को अपने ट्रेंड में शामिल करने का फैसला किया। भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गए मैच के दौरान #जयहिन्द हैशटैग खासा चर्चा में रहा था। इसे ट्विटर पर पहला हिन्दी हैशटैग होने का गौरव हासिल हुआ था। इसी तरह महाशिवरात्रि पर #हरहरमहादेव हैशटैग इंडिया ट्रेंड में शीर्ष में शामिल रहा। ट्विटर ने अपनी इस शुरुआत को ग्लोबल हैशटैग नाम दिया।

फेसबुक पर भी हिन्दीभाषियों की अधिकांश पोस्ट हिन्दी में ही आ रही हैं और इनकी संख्या हर दिन तेजी से बढ़ रही है। हिन्दी टाइपिंग सीखने की आवश्यकता के कारण अभी भी कुछ लोग इससे दूर हैं लेकिन नई तकनीकों के विस्तार के चलते वह दिन दूर नहीं जब हर पोस्ट हिन्दी में दिखाई देगी।

 

Go Back

Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;cff38901a92ab320d4e4d127646582daa6fece06175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;c1ebe705c563d9355a96600af90f2e1cfdf6376b175;250;911552ca3470227404da93505e63ae3c95dd56dc175;250;752583747c426bd51be54809f98c69c3528f1038175;250;ed9c8dbad8ad7c9fe8d008636b633855ff50ea2c175;250;969799be449e2055f65c603896fb29f738656784175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना