अनंत/ बिहार के पत्रकारों ने कट्टधारी को बड़ा डॉन बना दिया। चंदन मिश्रा एक शातिर अपराधी था जिसकी हत्या गैंगवार में हुई है। मीडिया में ऐसा कोहराम मचा मानों मृतक मासूम था। जितना इस खबर दिखाया गया अपराधी को अपराध की दुनिया में उतनी ही स्थिति मजबूत हुई। अब तो उस शूटर रेट और खौफ भी बढ़ गया है। उसे जो नहीं जानते थे अब उसे जान गए। सच कहे तो मीडिया जाने अनजाने उसे हीरो बना दिया। अपराध के खबरों की संवेदनशील रिपोरटिंग नहीं होगी तो अपराधियों का वर्चस्व बढ़ेगा। अपराधियों का वर्चस्व बढ़ाने में मीडिया की भूमिका रही है। यह कोई नई बात नहीं है। यह काम लंबे समय से चल रहा है। कई घटनाओं में पत्रकारों की संलिप्ता की भी बात काफी पहले आ चुकी है। एक लोकल न्यूज चैनल से अपहरणकर्ता की गिरफ्तारी भी हुई थी।
बिहार में जितने छुटभैये क्रिमिनल रहे उन्हें बिहार की मीडिया ने डॉन लिखा। यही डॉन बाद में विधानसभा भी पहुंचे। माननीय बनने के बाद भी इनका महिमा मंडन जाती और धन के आधार पर हुआ। ऐसा समाज सोचता है कि अपराध मुक्त राज्य बने बिहार । यह कैसे संभव है?
यही मीडिया जब किसी मासूम की हत्या होती है तो महज एक सूचना देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेती है। क्यों नहीं किसी आम आदमी की हत्या के बाद यही मीडियाकर्मी न्याय दिलाने के लिए आगे क्यों नहीं बढ़ते। जब तक आम आदमी को न्याय नहीं मिलेगा , आम आदमी के सवाल नहीं उठेंगे तब तक अपराध पर लगाम लगाना असंभव है।

