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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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Blog posts : "पुस्तक समीक्षा"

ऐतिहासिक है नरेंद्र मोदी पर लिखी प्रकाश हिन्दुस्तानी की पुस्तक

समीक्षा/ बी.पी. गौतम /प्रकाश हिन्दुस्तानी, यह नाम स्वयं ही एक ब्रांड है। अपने लेखन के चलते पत्रकारिता जगत में बहुचर्चित प्रकाश हिन्दुस्तानी का नाम व चेहरा हर पाठक पहचानता है, उनके बारे में जितनी अधिक बात की जाये, उतनी कम ही रहेगी, इसलिए पिछले दिनों उनके द्वारा लिखी गई…

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अभूतपूर्व चुनाव का अहम दस्तावेज 'मोदी लाइव'

पत्रकार संजय द्विवेदी की पुस्तक है 'मोदी लाइव'

लोकेन्द्र सिंह / सोलहवीं लोकसभा का आम चुनाव अपने आप में अनोखा था। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह पहला मामला था जब समस्त राजनीतिक दल सत्ताधारी पार्टी…

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जिन्दगी के तल्खी को पुकारती आवाज़-ए-ज़मीर

पुस्तक समीक्षा/  एम. अफसर खां सागर/ ‘आवाज़-ए-ज़मीर’ हुकम सिंह ‘ज़मीर’ के 103 गजलों का संग्रह है। ज़मीर साहब पुलिस विभाग में उच्च पद पर रहते हुए भी इंसानी जिन्दगी के हर पहलू पर बड़े ही फलसफाना अंदाज में शेर कहें हैं। पुलिस सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक,…

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कमसारनामाः कमसार व बार का अक्स

एम. अफसर खां सागर /कमसारनामा में सुहैल खां ने गाजीपुर के संक्षिप्त इतिहास के साथ-साथ सकरवार वंश के क्रम में यहां के भूमिहार ब्राहमणों, कमसार के पठानों और राजपूतों की चार सौ अस्सी साल के  वंशावली तथा इतिहास को संकलित करने का अनूठा काम किया है। सुहैल खां ने प्रस्तुत पुस्तक मे…

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पत्रकारिता में अपना कैरियर बनाइए

व्यवहारिक पत्रकारिता पर ज्यादा जोर

अखबारी पत्रकारिता पर अनेक किताबें बाजार में हैं। इन्हीं में एक किताब और जुड़ गई है- "पत्रकारिता में अपना कैरियर बनाइए"। यह बाकी से इस मायने में अलग है कि इसमें सिद्धांत पर कम अख़बारों की व्यावहारिक पत्रकारि…

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ईश्वर से संवाद करती कविताएं

‘सत्य-स्वन ’ रामकृपाल शर्मा के जीवन की अन्तिम कृति

एम. अफसर  खां सागर/ रामकृपाल शर्मा के जीवन की अन्तिम कृति ‘सत्य-स्वन ’ लघु का…

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अमर शहीद जगदेव प्रसाद: जीवन और विचार

 डा0 राधाकृष्ण सिंह / पुस्तक-समीक्षा/ इधर युवा लेखक जीतेन्द्र वर्मा की नई पुस्तक अमर शहीद जगदेव प्रसाद: जीवन और विचार…

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विस्मृत संत की खोज

एम.अफसर  खान सागर / विनय कुमार वर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘संत नरहरिदास ’ एक महान अज्ञात संत पर शोध कार्य करके बड़ी बारीकी से लिखा गया ग्रंथ है।…

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समभाव के पुनर्जागरण हेतु

एम. अफसर खां सागर/ ‘प्राचीन संस्कृति में एकता के सूत्र’ पुस्तक में डा एस के मिश्रा ने सामाजिक सौहार्द के सूत्रों को प्राचीन संस्कृति के बीच से खोजने का प्रयास किया है।…

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लेखकों के संसार में

लेखकों और समकालीन लेखन परिदृश्य को समझें -पहचानने का अवसर

कनक जैन / हिन्दी में साक्षात्कार पुरानी किन्तु उपेक्षित विधा है। साक्षात्कार आम तौर पर राजनेताओं और फ़िल्मी अभिनेताओं के ही छपते हैं। …

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सोशल नेटवर्किंगः नए समय का संवाद

सोशल नेटवर्किंग पर केंद्रित संजय द्विवेदी  द्वारा संपादित एक नई किताब बाजार में आ गयी है। इसे दिल्ली के यश पब्लिकेशंस ने छापा है। …

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हृदय द्वार पर दस्तक देतीं कविताएं

एम. अफसर खान / ‘फूल, तितलियां, सपने और सीख’ एम. एन. सिन्हा ‘मुकुल’ की पहली कविता संग्रह है।

कुल छत्तीस कविताओं का यह संग्रह सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और पारिवारि…

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भोगे हुए यथार्थ का प्रस्फुटन

एम. अफसर खां सागर / ‘शब्द की हिमशिला अब पिघलने लगी’ अमरनाथ राय की तीसरी कविता संग्रह है। यह संग्रह सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और पारिवारिक समेत अन्य तमाम विद्रुपताओं के सरोकारों को परिलक्षित करता है। वक्त के बदलते मिजाज के साथ सब कुछ रेत की मानिन्द हाथ से फिसल जाता है अगर कु…

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प्रमुख चुनौतियां पर दृष्टिपात

पुस्तक “इक्कीसवीं सदी में भारत के सरोकार”

न्याय मूर्ति गोविन्द माथुर करेंगे विद्या भवन में विमोचन

नन्द किशोर शर्मा …

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रक्त बीज के वंशजः सच्ची घटनाओं का शिल्प

पुस्तक समीक्षा /एम. अफसर खां सागर /व्यंग्य विधा से कथा और उपन्यास के क्षेत्र में पदापर्ण करने वाले रामजी प्रसाद ‘भैरव’ अपनी पहली कृति ‘रक्त बीज के वंशज’  में औपन्यासिक मापदण्डों पर खरे उतरते हैं। उपन्यास की कथावस्तु पूर्वी उत्तर प्रदेश में चन्दौली …

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आधुनिक कहानी : स्लोवाकिया

पुस्तक चर्चा / दो देशों के मध्य सांस्कृतिक तथा साहित्यिक सम्बन्ध सुदृढ़ बनाने की दिशा में वाणी प्रकाशन प्रतिबद्ध दिखता है। आधुनिक कहानी श्रृंखला के अन्तर्गत  'आधुनिक कहानी : आस्ट्रिया, आधुनिक कहानी : स्विट्ज़रलैंड', अफगानिस्तान-ईरान, चीन, रूस, अरबिस्तान, जर्मनी,  इसी श्रृंखला क…

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कांशीराम ''चमचा युग'' के आईने से

जयंती 15 मार्च पर विशेष

संजीव खुदशाह / दलित सिख परिवार में 15 मार्च को जन्मे मान्यवर कांशीराम ने भारत के बहुजन समाज को जो नेयमते बक्शी है वह काबिले गौर है.  पूणे में सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होने महसूस किया कि दलित बहुजन बिखरा हुआ और शोषित …

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सम्पादक

डॉ. लीना