Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

‘’फ्रंटलाइन’’ पत्रिका फिर से शुरू

उप-राष्‍ट्रपति ने एक समारोह में पुनर्शुरूआत की

नई दिल्ली / उप-राष्‍ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने आज यहां एक समारोह में ‘’फ्रंटलाइन’’ पत्रिका की पुनर्शुरूआत की। उन्‍होंने बदले हुए समय में नये पाठकों के लिए पत्रिका की प्रासंगिकता को बनाए रखने की इस पहल के लिए सम्‍पादकों और प्रकाशकों की सराहना की। उन्‍होंने विचारशील पाठकों की सेवा में ‘फ्रंटलाइन’ की लगातार सफलता की कामना की।

इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि फ्रंटलाइन हमेशा से हर मुद्दे पर अच्‍छी पठन सामग्री प्रदान करने के अलावा उनका ज्ञानवर्धन करती रही है। इसलिए बॉलीवुड की भाषा में इसमें रीमिक्‍स की जरूरत नहीं है और न ही अनुमानों के साथ इसमें रोमांच डालने की जरूरत है।

उन्‍होंने कहा कि नये अवतार में पत्रिका में कला, संस्‍कृति, परम्‍परा, वन्‍यजीव, पर्यावरण और भूमि तथा लोगों के बारे में आकर्षक तस्‍वीरों के साथ लेख देखने को मिलेंगे। इसमें मीडिया और साहित्‍य, भारत के विकास संबंधी तस्‍वीरें, विज्ञान पत्रिका के अलावा सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर गहरा विश्‍लेषण पढ़ने को मिलेगा।

उप-राष्‍ट्रपति ने कहा कि ‘’हिन्‍दू समूह’’ की समृद्ध विरासत है और उसने निष्‍पक्षता और न्‍याय के अपने शुरूआती आदर्श वाक्‍य को बनाए रखा है। फ्रंटलाइन भी इसे आगे जारी रखेगी।

श्री अंसारी ने कहा कि आज के युग में दृश्‍य – श्रव्‍य, मीडिया, करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों संस्‍कृति और मनोरंजन की खबरों के लिए प्रमुख माध्‍यम बन गया है, इसके बावजूद महत्‍वपूर्ण विषयों पर गंभीर प्रकाशनों की वास्‍तविक और लोकप्रिय मांग बनी हुई है, जिसका स्‍थान ‘’ब्रेकिंग न्‍यूज़’’ की संस्‍कृति और इलैक्‍ट्रोनिक मीडिया की कतरने नहीं ले सकती।

Go Back

Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;cff38901a92ab320d4e4d127646582daa6fece06175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;c1ebe705c563d9355a96600af90f2e1cfdf6376b175;250;911552ca3470227404da93505e63ae3c95dd56dc175;250;752583747c426bd51be54809f98c69c3528f1038175;250;ed9c8dbad8ad7c9fe8d008636b633855ff50ea2c175;250;969799be449e2055f65c603896fb29f738656784175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना