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सोशल मीडि‍या में अवसरों को भुनाने की आश्‍यकता है:अरुण जेटली

नई दिल्ली। वि‍त्‍त, कॉरपोरेट मामले, सूचना और प्रसारण मंत्री  अरुण जेटली ने कहा कि‍ प्रौद्योगि‍की के कारण संचार के परि‍दृश्‍य में बदलाव आया है और डि‍जि‍टल मीडि‍या की पहुंच, परि‍माण, वि‍वि‍धता और सुलभता के कारण आने वाला समय इसका होगा।

श्री जेटली ने 2 फरवरी को नई दिल्ली में राष्‍ट्रीय मीडि‍या केन्‍द्र में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत पत्र सूचना कार्यालय द्वारा 'सरकारी संचार को व्‍यवस्‍थि‍त बनाने' पर आयोजि‍त कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि तकनीकी पर जोर के कारण दुनि‍या भर के मंचों पर बदलाव को देखते हुए जानकारी के प्रसार के तरीके पर भी असर पड़ा है। तेजी से हो रहे इस बदलाव से मीडि‍या में तकनीकी संपर्क बिंदुओं का रूपांतरण हुआ, जि‍सका प्रभाव सूचना के प्रसार के प्रवाह और प्रकृति‍ पर पड़ा है। श्री जेटली ने कहा कि‍ लगातार 24 घंटे चलने वाले टेलीवि‍जन से मि‍लने वाली चुनौति‍यों के कारण समाचारों के प्रसार के तरीकों में बदलाव आया है। आज एजेंडा तय करने और वि‍षय वस्‍तु के लि‍ए कैमरा प्रमुख हो गया है जि‍ससे न्‍यूज़ के प्रवाह पर असर पड़ रहा है। बदलते संचार परि‍प्रेक्ष्‍य में सरकारी संचार के महत्‍व और उपयुक्‍तता पर श्री जेटली ने कहा कि‍ आज के वातावरण में सरकार में हि‍तधारकों के लि‍ए वि‍श्‍वसनीय, तथ्‍यपरक, उपयुक्‍त और पाठक के अनुकूल जानकारी के प्रसार के अत्‍यधि‍क अवसर हैं। आज भी कि‍सी बड़े नि‍र्वाचन क्षेत्र के लि‍ए सरकार से प्रामाणि‍क और वि‍श्‍वसनीय जानकारी की आवश्‍यकता होती है।

मंत्री महोदय ने प्रति‍भागि‍यों से आधुनि‍क उपकरणों और तरीकों, मीडि‍या की जरूरतों और राय बनाने वालों तथा मीडि‍या में वि‍श्‍लेषकों के लि‍ए सामग्री को ध्‍यान में रखते हुए आंकड़े तैयार करने, तथ्‍य इकट्ठा करने और जानकारी देने को कहा। 

सरकारी सूचना के पैकेजिंग के बारे में मंत्री महोदय ने जोर दि‍या कि‍ सरकारी वि‍भागों को सही और वि‍श्‍वसनीय जानकारी देने के लि‍ए उनकी वेबसाइटों का अधि‍क से अधि‍क उपयोग करने की आवश्‍यकता है। सरकार की नीति‍यों और कदमों से संबंधि‍त जानकारी लेने वाले हि‍तधारकों की शंकाओं को दूर करने के लि‍ए वेबसाइट एक महत्‍वपूर्ण माध्‍यम है। वेबसाइट की सामग्री ऐसी भाषा में होनी चाहि‍ए जि‍से आसानी से पढ़ा और समझा जा सके। प्रत्‍येक मंत्रालय को ऐसी प्रक्रि‍या बनाने की आवश्‍यकता है जि‍सकी पहुंच हि‍तधारकों तक हो। हि‍तधारकों में जनता/सि‍वि‍ल सोसाइटी के प्रति‍नि‍धि‍ सहि‍त बड़ी संख्‍या में लोग शामि‍ल हैं। श्री जेटली ने सरकारी संचार की पहुंच को बढ़ाने के लि‍ए सोशल मीडि‍या में उपलब्ध ट्वि‍टर, ब्‍लॉग, फेसबुक जैसे वि‍भि‍न्‍न उपकरणों के उपयोग की आवश्‍यकता के बारे में भी बताया। अपने संबोधन के दौरान मंत्री महोदय ने यह भी कहा कि‍ सरकार द्वारा लि‍ए गए नि‍र्णयों के बारे में बताते समय मीडि‍या को समेकि‍त वि‍चार अपनाने की आवश्‍यकता है। 

सूचना एवं प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि‍ वर्तमान संचार का परि‍दृश्‍य रफ्तार‍, सटीक, संक्षि‍प्‍त और स्‍पष्‍ट वि‍चारों से चालि‍त हैं। बड़ी संख्‍या में हि‍तधारकों तक पहुंच बढ़ाने के लि‍ए संचार के नए उपकरणों का उपयोग करना महत्‍वपूर्ण है। संचार के परि‍प्रेक्ष्‍य में अनुभूति‍ का प्रबंधन एक महत्‍वपूर्ण उपकरण बन गया है और इसे संपूर्णता में देखने की आवश्‍यकता है। 

अपने उद्घाटन भाषण में सूचना और प्रसारण सचिव बिमल जुल्का ने सरकारी संचार के तरीकों के बारे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों का ब्यौरा दिया। श्री जुल्का ने सोशल मीडिया में 360 डिग्री के दृष्‍टि‍कोण को अपनाने, एकीकृत मीडिया योजना और पहलों के बारे में मि‍ल रही नई चुनौतियों को दूर करने के लिए मंत्रालय द्वारा कि‍ए गए मुख्य उपायों के बारे में बताया। श्री जुल्का ने स्वच्छ भारत मिशन, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और प्रधानमंत्री की जनधन योजना के लिए की गई विशिष्ट पहल और संकट की स्थिति को दूर करने के लिए मंत्रालय द्वारा किए गए प्रयासों को रेखांकित किया। विचार/अनुमोदन के प्रस्तावों में आईईसी घटक को एकीकृत करने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने भागीदारों से कैबिनेट प्रस्ताव तैयार करने का आह्वान किया। इससे संचार प्रयासों में बढ़ोतरी होगी और बजटीय आवश्यकताएं पूरी होंगी। 

अपने स्वागत भाषण में पत्र सूचना कार्यालय के महानिदेशक फ्रैंक नरोन्हा ने इस कार्यशाला के आयोजन के औचित्य और सरकार की संचार जरूरतों को पूरा करने में पत्र सूचना कार्यालय के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि‍ मीडिया में परिवर्तन और हितधारकों की आवश्यकताओं को देखते हुए पत्र सूचना कार्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने सरकारी नीतियों/कार्यक्रमों की बेहतर पहुंच के लिए विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के बीच तालमेल की जरूरत पर भी जोर दि‍या। 

एक दि‍न की इस कार्यशाला में बदलते मीडिया परिदृश्य अर्थात सोशल मीडिया का उत्थान, क्षेत्रीय मीडिया के लिए सरकार की वित्तीय नीति का संचार और मीडिया संचार में तकनीकी सत्रों, पैनल चर्चाओं, खुला मंच विचार-विमर्श, प्रश्नोत्तर सत्रों आदि द्वारा पीएमओ परिदृश्यों के बारे में विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस कार्यशाला में संयुक्त सचिव और इससे ऊंचे स्तर के अधिकारी, विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से मंत्रियों के निजी सचिव भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न मीडिया मंचों के माध्यम से सरकारी संचार की बढ़ी भूमिका को एकीकृत करना है।  

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सम्पादक

डॉ. लीना