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सूचना सेवा में मिले पेशेवरों को तवज्जो

नयी दिल्ली/ भारतीय सूचना सेवा में पेशेवरों की स्थिति को लेकर शुरू किए गए राष्ट्रीय विमर्श के पहले चरण के तहत नई दिल्ली में “भारतीय सूचना सेवा: दशा, दिशा और पेशेवर” विषय पर मीडिया स्कैन द्वारा आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य और भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रभात झा ने कहा कि केंद्र सरकार ने गरीब लोगों के कल्याण के लिए बेहतरीन योजनाएं और कार्यक्रम तैयार किए हैं लेकिन लक्षित समूह तक इन योजनाओं की सूचनाएं नहीं पहुंच पा रही है। 

उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार को चिंतन करने की आवश्यकता है। उन्होंने जनता तक वास्तविक सूचनाओं के नहीं पहुंचने को राष्ट्रीय अपराध करार दिया। राज्यसभा सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार के पास सूचना का बड़ा नेटवर्क है जिसे पूरी तरह पेशेवर आकार देने की जरूरत है। 
कार्यशाला में शिक्षा बचाओ आंदोलन के अतुल कोठारी ने कहा कि सरकार में पेशेगत दक्षता हर विभाग की जरूरत है। सूचना सेवा पर चर्चा करते हुए श्री कोठारी ने कहा कि इस सेवा में कार्यरत विशेषज्ञों को सही अवसर नहीं मिलने के कारण केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। 

न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री एन. के. सिंह ने सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर सूचना सेवा के विशेषज्ञों को नियुक्त करने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में अंग्रेजी मानसिकता ने देश में विशेषज्ञता को पनपने ही नहीं दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर क्षेत्र में पेशेवर कुशलता पर जोर दे रही है, जो समय की जरूरत है। 

इससे पहले भारतीय सूचना सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एन. बी. नायर ने सूचना सेवा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सूचना और प्रसारण मंत्रालय में सूचना सेवा की शुरुआत सत्तर के दशक में पेशेगत दक्ष पत्रकारों को नियुक्त किया जाता था लेकिन बाद में अस्सी के दशक में नौकरशाही ने इसमें बदलाव कर इस सेवा को इसके मूल उद्देश्य से ही भटका दिया। 

कार्यक्रम में भारतीय जनसंचार संस्थान में प्राध्यापक शिवाजी सरकार, दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष अनिल पांडे और माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में मीडिया से जुड़े छात्रों और पत्रकारों ने भी अपने विचार रखे।

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सम्पादक

डॉ. लीना