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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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सुदृढ़ समाज का निर्माण करने का दायित्व भी पत्रकारिता का: शिंदे

“दैनिक भास्कर” के पटना संस्करण की शुरुआत, समारोह में सोशल मीडिया पर भी खूब हुई चर्चा

पटना। केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि लोगों की जीवनशैली में सुधार और सुदृढ़ समाज का निर्माण करने का दायित्व भी पत्रकारिता का है। कल पटना में दैनिक समाचार पत्र “दैनिक भास्कर” के 67 वें संस्करण के लोकार्पण समारोह में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर गलत तथ्यों का प्रकाशन शांति व्यवस्था के लिए खतरा भी साबित हो सकता है।

इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया का प्रभाव सभी आयु वर्गों पर देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि समाचार-पत्रों और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बीच सोशल मीडिया का भी तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रो, इलेक्ट्रानिक चैनलो के बीच सोशल मीडिया का भी तेजी से विस्तार हुआ है। मीडिया का यह क्षेत्र युवाओं में ख़ासा लोकप्रिय है। मंच पर मौजूद अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद यादव का नाम लिये बिना नीतीश कुमार ने इशारों ही इशारों में कहा कि अब तो पुराने लोग भी ट्वीट करने लगे है। उन्होंने कहा कि एक दिन पत्रकारों से बातचीत के क्रम में हमने बताया था कि चिडि़या की चहचहाहट को ..टवीट्.. कहते है। वहीं ट्वीट को हिंदी मे ..चेचियाना.. कहते है।

मुख्यमंत्री ने समाचार पत्रो को स्वच्छ स्पर्धा से आगे बढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि समाचार पत्र बिहार की खासियत मेधावी युवा पीढ़ी के साथ- साथ कृषि को अपने पन्नों मे स्थान दें।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगो को इस बात की फिक्र लगी रहती है कि कौन सी खबर कहा छपेगी और कौन सी फोटो कहा लगेगी यह तो अलग-अलग दौर की अलग-अलग कहानी है। मुझे इस बात की कोई फिक्र नहीं होती कि कौन सा समाचार कहा छपा है । उन्होने कहा कि समाचार पत्र का अवलोकन इस लिए करता हूं कि कोई ऐसी खबर तो नहीं है जिस पर मेरा ध्यान नहीं गया और उस पर तत्परता से कार्रवाई करने का मौका नहीं मिला।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद ने मीडिया की चुनौतियों पर प्रकाश डाला और कहा कि इससे आज हर कोई वाकिफ है। उन्होंने कहा कि मीडिया को किसी के दवाब में आकर काम करने की जरूरत नहीं है। यह लोकतंत्र का प्रहरी होता है और उसकी भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए।

 

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सम्पादक

डॉ. लीना