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सरकार की संचार रणनीति में नव परिवर्तनशील विचारों को समाविष्ट किया जाना चाहिए : वेंकैया नायडु

सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों से मुलाकात की

नई दिल्ली/ केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का संचार दृष्टिकोण प्रधानमंत्री के “सुधार, निष्पादन एवं रूपांतरण” के विजन को आगे ले जाने के लिए सरकार की मुख्य पहलों के बारे में उन्हें जानकारी देने के द्वारा लोगों के सशक्तिकरण हेतु प्रयत्न करने वाला होना चाहिए। बदलते संचार प्रतिमान के साथ तालमेल बनाने के लिए संचार रणनीति का फोकस नव परिवर्तनशील एवं लीक से हटकर विचारों को समाविष्ट करने पर होना चाहिए। प्रोद्योगिकी ने संचार दृष्टिकोण को परिभाषित करने, विशेष रूप से विभिन्न मीडिया मंचों की बढ़ी हुई भूमिका के साथ, में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। श्री नायडु ने आज यहां भारतीय सूचना सेवा अधिकारियों के हाल के बैचों को संबोधित करने के दौरान इसका जिक्र किया।मंत्री महोदय ने कहा कि देश में एक शहरी - ग्रामीण विभाजन है और संचार प्रबंधकों को ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विशाल मिश्रित वर्गों, सीमांत समुदायों की समस्याओं को दूर करने के लिए उपयुक्त कार्य नीति बनानी चाहिए तथा महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस करना चाहिए। इसे और अधिक स्पष्ट करते हुए श्री नायडु ने कहा कि लोगों के साथ नव प्रवर्तक उत्पादों, सृजनशील संदेशों एवं एक ऐसी भाषा में जो आसानी से समझ में आए, जुड़ना महत्वपूर्ण है। मंत्री महोदय ने लोगों तक पहुंचने के लिए एक नव प्रवर्तक दृष्टिकोण के रूप में प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का उदाहरण प्रस्तुत किया। सरकार के संचार प्रबंधकों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों एवं जीएसटी, जनधन योजना, नीम लेपित यूरिया आदि जैसी योजनाओं की दिशा में अपने दृष्टिकोण पर फिर से गौर करने की भी चुनौती है।

मंत्री महोदय ने भारतीय सूचना सेवा अधिकारियों के लिए सरकार की पहुंच, विशेष रूप से सोशल मीडिया के युग में, बढ़ाने के लिए नई प्रौद्योगिकियों, उपकरणों, तकनीकों को सीखने तथा उनका अनुपालन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सोशल मीडिया परिपेक्ष्य उन तरीकों को बदल दिया है जिसमें हम संवाद तथा प्रशासन करते हैं। इसने अधिकारियों के लिए चुनौतियां और अवसर प्रदान किया है। अपनी बातचीत में, मंत्री महोदय ने विचारों में प्रगतिशील होने तथा प्रत्येक अधिकारी को सुपुर्द भूमिका तथा जिम्मेदारी में गौरव महसूस करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से, मंत्रालय द्वारा विभिन्न कैरियर स्तरों पर उपर्युक्त प्रशिक्षण के जरिये क्षमता निर्माण को संस्थागत बनाने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया।

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सम्पादक

डॉ. लीना