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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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सकारात्मक पत्रकारिता की आज सर्वाधिक आवश्यकता: डॉ राजनारायन शुक्ल

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर में आयोजित समारोह में ‘भाषा मित्र सम्मान- 2018’ से नवाजे गए प्रोफेसर अरुण भगत

नोएडा/ उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान द्वारा बुधवार को देश के जाने-माने साहित्यकार प्रोफेसर अरुण कुमार भगत को ‘भाषा मित्र सम्मान-2018’  प्रदान किया गया । यह सम्मान केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा के उपाध्यक्ष कमल किशोर गोयनका एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष डॉ राजनारायन शुक्ल के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया। प्रो. भगत को सम्मान स्वरूप  प्रशस्ति पत्र व शाल भेंट  किया है। समारोह का आयोजन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर में किया गया।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, लखनऊ ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर प्रदेश के पाँच वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित करने का निर्णय किया था। 24 जनवरी 18 को स्थापना दिवस के ही अवसर पर लखनऊ मे सारस्वत अनुष्ठान का आयोजन किया था, किन्तु प्रो. भगत अपनी अस्वस्थता के कारण वहाँ नहीं जा सके थे।

डॉ राजनारायन शुक्ल ने कहा कि नकारात्मक पत्रकारिता हर जगह फैल रही है। सकारात्मक पत्रकारिता की आवश्यकता आज सर्वाधिक है। प्रो भगत के साहित्यिक और पत्रकारीय योगदान में सकारात्मकता है।   

उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर भगत ने साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट भूमिका निभाते हुये अब तक लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। आपातकालीन साहित्य को संकलित करते हुये इन्होंने ‘आपातकालीन काव्य : एक अनुशीलन’, हिन्दी पत्रकारिता : सिद्धान्त से प्रयोग तक, आपातकाल की प्रतिनिधि कवितायें (दो  खंडों में) और ‘जब कैद हुई अभिव्यक्ति’ सहित कई  पुस्तकें लिखी जो साहित्य के क्षेत्र में काफी चर्चित रही हैं।

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुये केन्द्रीय हिन्दी संस्थान आगरा के उपाध्यक्ष कमल किशोर गोयनका ने कहा कि सच को बोलना बहुत मुश्किल है। सच को लिखना उससे भी मुश्किल है और सच को सुनना सबसे अधिक मुश्किल होता है । समय के सापेक्ष सच को लिखना ही पत्रकारिता की साधना है। इतिहास की खोज, नए इतिहास का निर्माण सत्यानुसंधान से ही संभव है। हमेशा सच को ही उद्घाटित करना चाहिए। उन्होने कहा कि प्रो भगत मेरे शिष्य नही रहे फिर भी वह मुझे गुरु हीं मानते है। लगभग 40 वर्ष मैं दिल्ली विवि मे अध्यापक रहा हूँ लेकिन  किसी छात्र ने ऐसी  अनुभूति नहीं करायी। कोई पुत्र अपने पिता को और कोई विद्यार्थी अपने गुरु को पीछे करता है तो वह पल काफी हर्षित करने वाला होता है। ऐसा ही मै आज महशुश कर रहा हूँ ।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरभ मालवीय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन मीता उज्जैन ने किया।  इस अवसर पर प्रोफेसर बीएस निगम, रजनी नागपाल, सूर्य प्रकाश, लाल बहादुर ओझा, डॉ रामशंकर सहित सभी प्राध्यापक व विद्यार्थी मौजूद रहे।  

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सम्पादक

डॉ. लीना