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वैश्विक हिंदी सम्मेलन : विश्व पटल पर हिंदी और महात्मा गाँधी

‘ वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई ’ द्वारा विश्व हिंदी दिवस पर ‘विश्व पटल पर हिंदी और महात्मा गाँधी’ विषय पर आयोजित वैश्विक संगोष्ठी में मॉरिशस के वरिष्ठ साहित्यकार राज हीरामन को ‘वैश्विक साहित्य-सारथी सम्मान’ 

मॉरिशस के वरिष्ठ साहित्यकार राज हीरामन ने विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर  ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई’ द्वारा  ‘विश्व पटल पर हिंदी और महात्मा गाँधी’ विषय पर आयोजित वैश्विक संगोष्ठी में कहा कि भारत की पहचान विश्व में महात्मा गांधी से है, हिंदी से लेकिन भारत के लोग दोनों की कद्र नहीं कर रहे।  उन्होंने कहा कि मॉरिशस में हिंदी रोजी की भाषा है, रोटी की भाषा है। नोट की भाषा है और वोट की भाषा है।

विषय प्रवर्तन करते हुए ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के अध्यक्ष डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ ने कहा कि हिंदी के प्रयोग व प्रसार को बढ़ाने के लिए सर्वाधिक योगदान महात्मा गाँधी का रहा । उन्होंने कहा कि के हिंदी के प्रसार के लिए साहित्यकार, पत्रकार और हिंदी प्रेमी समुदाय को विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी का माँग करनी होगी। कुछ लोगों द्वारा हिंदी के लिए रोमन लिपि को स्वीकार करने के शिगूफे को भारतीय-भाषा विरोघी बताते हुए ऐसे कोशिशों का माकूल जवाब देने की बात कही।

 संगोष्ठी के प्रमुख वक्ता जवाहर कर्णावट ने विश्व स्तर पर हिंदी का बढ़ता माँग को रेखांकित करते हुए भारत के लोगों को हिंदी का प्रयोग करने और ग्राहकों द्वारा सभी सुचनाएँ व सुविधाएँ हिंदी में दिए जाने की माँग करने और हिंदी में उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करने की बात कही। मुख्य अतिथि डॉ. रमाकांत गुप्ता, महाप्रबंधक भारतीय रिजर्व बैंक ने द्विभाषिकता को हिंदी के प्रसार के लिए एक बड़ी बाधा बताया। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सुधाकर मिश्र ने हिंदी का प्रयोग बढाने पर जोर दिया।डॉ. उमेश शुक्ल मे सम्मान-मूर्ति का परिचय दिया। हिंदी सेवी प्रवीण जैन ने प्रतिभागियों को हिंदी का प्रयोग करने की शपथ दिलवाई ।

 इस अवसर पर राज हीरामन को हिंदी साहित्य में उनके विशिष्ट योगदान के लिए ‘वैश्विक साहित्य-सारथी सम्मान’ प्रदान किया गया । मुरलीधर पांडेय ने सरस्वति वंदना  प्रो. विजय मिश्र व माता कृपाल उपाध्याय ने कविता पाठ प्रतुत किया । कार्यक्रम का संचालन श्रीमती विधि जैन ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में पत्रकारिता कोष के संपादक आफताब आलम, , डॉ. कामिनी गुप्ता,रामवचन राय, महेश पाठक, उत्कर्ष, मंजरी तथा डॉ. कामिनी गुप्ता का विशेष योगदान रहा। 

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सम्पादक

डॉ. लीना