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लोकसभा अध्यक्ष ने "भ्रष्टाचार" का किया लोकार्पण

प्रो. शत्रुघ्न कुमार का दलित कहानी संग्रह है "भ्रष्टाचार"

नई दिल्ली । दिल्ली के द्वारका में पूर्वांचल एकता मंच द्वारा दो दिवसीय विश्व भोजपुरी सम्मेलन का आयोजन पिछले दिनों किया गया। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी इस कार्यक्रम में भोजपुरी प्रेमियों की अपार भीड़ एकत्रित हुई। कार्यक्रम के पहले दिन का शुभारम्भ इग्नू के प्रोफेसर शत्रुघ्न कुमार द्वारा दीप प्रज्वलित करने से हुआ। इस अवसर पर पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह, महासचिव संतोष पटेल, डा. गुरूचरण सिंह, डा. गोरखनाथ मस्ताना, प्रो. वीरेन्द्र नारायण यादव आदि गणमान्य व्यक्तियों ने भी दीप प्रज्ज्वलित की।

 कार्यक्रम के प्रथम सत्र में भोजपुरी एवं हिन्दी के अंतर संबंध विषय पर विद्वानों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इग्नू के  भोजपुरी भाषा साहित्य एवं संस्कृति केन्द्र के सूत्रधार एवं संयोजक प्रो.शत्रुघ्न कुमार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में सभी विद्वानों द्वारा व्यक्त किये गये तथ्य को संक्षिप्त रूप से जनता के सामने रखा कि भोजपुरी और हिन्दी का ना केवल गहरा संबंध है, बल्कि दोनों के विकास विस्तार से दोनों भाषाओं पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ सकता। भोजपुरी भाषा को सम्मान दिलाने के लिये यह जरूरी है कि सभी बिना भेदभाव के इस भाषा का प्रयोग करें अर्थात जीवन की दिनचर्या में इसे सम्मान के साथ बोलें तभी भाषा का विकास एवं विस्तार संभव होगा।

 बीच-बीच में कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी लोक संस्कृति की समृद्ध परंपरा को चैता, गोड़ऊ नाच, पखावज नाच आदि प्रस्तुत किए गए। दिल्ली के निवासियों को इसके द्वारा भोजपुरी संस्कृति की समृद्ध परंपरा से परिचय होने का मौका मिला।

इस कार्यक्रम में उस समय चार चांद लग गया, जब भोजपुरी मांटी की बिटिया लोकसभा अध्यक्षा श्रीमती मीरा कुमार का आगमन हुआ। अपने पिता पूर्व उप प्रधानमंत्री स्वर्गीय बाबू जगजीवन राम की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली तथा भोजपुरी भाषा को गौरवशाली स्थान दिलाने वाली श्रीमती मीरा कुमार स्वयं भोजपुरी भाषा की मर्मज्ञ तो हैं ही साथ ही साथ कवियत्री भी हैं। उन्होंने इग्नू के प्रो. शत्रुघ्न कुमार द्वारा रचित प्रथम प्रथम भोजपुरी दलित कहानी संग्रह ’भ्रष्टाचार’ का विमोचन किया। इस अवसर पर सांसद महाबल मिश्र, स्थानीय विधायक सत्यप्रकाश राणा, प्रो. जितेन्द्र स्वामी, डा. गोरख नाथ मस्ताना, पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह, महासचिव संतोष पटेल एवं संरक्षक बी.आर. चैधरी के अलावा कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

प्रो. शत्रुघ्न कुमार हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, भोजपुरी, जापानी, रूसी, बोलचाल की रोमानियन सहित कई भाषाओं के विद्वान ही नहीं, बल्कि प्रसिद्ध दलित लेखक भी हैं। पिछले 20 वर्षों से उन्होंने गद्य, पद्य एवं आलोचना से संबंधित अनेकों किताबें लिखी हैं। वर्ष 1999 में लंदन में सम्पन्न हुए विश्व हिंदी सम्मेलन में उन्होंने ’दलित साहित्य’ का परचम लहराया। दलित साहित्य पर काम करने वाले शोध छात्रओं के लिए यह शोध पत्र मार्ग प्रशस्त करता है।

प्रो. शत्रुघ्न कुमार द्वारा रचित कहानियां, कविताएं, बांग्ला, रूसी, हिब्रू, अंग्रजी, उर्दू, पंजाबी, मराठी आदि अनेकों भाषाओं में अनूदित एवं प्रकाशित हो चुकी है। देश-विदेश में प्रति-नियुक्ति पर रहते हुए प्रो. शत्रुघ्न कुमार ने दलित आंदोलन को मजबूती प्रदान की है। उन्हें कई पतिष्ठत संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 1999 में इग्नू में भोजपुरी भाषा-साहित्य पर पाठ्यक्रम बनाकर उन्होंने न सिर्फ इतिहास रचा है, बल्कि इग्नू के भोजपुरी भाषा, साहित्य, एवं संस्कृति केन्द्र का भी सूत्रपात किया है। यह संयोग ही कहा जाएगा कि दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक भव्य समारोह में, इग्नू के इस भोजपुरी भाषा के पाठयक्रम का लोकार्पण भी लोकसभा अध्यक्षा श्रीमती मीरा कुमार द्वारा ही हुआ था। उसी अवसर पर इग्नू के तत्कालीन कुलपति प्रो. राश्जशेखन पिल्लई ने इग्नू के इस भोजपुरी केन्द्र के निर्माण की घोषणा भी की थी। निश्चित रूप से प्रो. शत्रुघ्न कुमार द्वारा भोजपुरी भाषा में रचित यह कहानी संग्रह दलित आंदोलन को आगे बढ़ाने में एक सशक्त हथियार के रूप में काम करेगा।

 

 

 

 

 


 

 

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सम्पादक

डॉ. लीना