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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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मीडिया को वंचितों की आवाज बनना चाहिए : राष्ट्रपति

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय प्रेस परिषद द्वारा आयोजित समारोह में पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए किया पुरस्कारों का भी वितरण 

नयी दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि मीडिया को जनहित के प्रहरी की तरह काम करते हुए वंचितों की आवाज बनना चाहिए। पत्रकारों को बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने वाली घटनाओं को सार्वजनिक करना चाहिए। मीडिया की ताकत का इस्तेमाल हमारी नैतिक मान्यताओं को सदृढ़ करने, उदारता, मानवता और सार्वजनिक जीवन में शिष्टता को बढ़ावा देने में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विचार स्वतंत्र होते हैं लेकिन तथ्य सही होने चाहिए। किसी निर्णय पर पहुंचने में सतर्कता बरती जानी चाहिए, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जिनमें में कानून अपना काम कर रहा हो। उन्होंने कहा ,‘हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कैरियर और प्रतिष्ठा बनाने में वर्षों लग जाते हैं लेकिन ये चंद मिनटों में ही ध्वस्त हो जाते हैं।” श्री मुखर्जी यहां राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय प्रेस परिषद द्वारा आयोजित समारोह में बोल रहे थे।

श्री मुखर्जी ने राष्ट्रीय प्रेस परिषद द्वारा आयोजित समारोह में पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कारों का वितरण करने के बाद कहा कि प्रतिष्ठित पुरस्कार व्यक्ति की प्रतिभा और उसकी श्रेष्ठता के लिए दिये जाते हैं और इनका सम्मान किया जाना चाहिए तथा भावनाओं में आकर कोई कदम उठाने की बजाय असहमति को चर्चा के माध्यम से व्यक्त किया जाना चाहिए। प्रतिष्ठित पुरस्कार व्यक्ति की प्रतिभा, योग्यता और कड़ी मेहनत के सम्मान में दिये जाते हैं । पुरस्कार लेने वालों को इनका महत्व समझते हुए इन पुरस्कारों का सम्मान करना चाहिए । उन्होंने कहा कि समाज में कुछ घटनाओं के कारण संवेदनशील व्यक्ति कभी-कभी विचलित हो जाते हैं। लेकिन भावनाओं को तर्क पर हावी नहीं होने देना चाहिए और असहमति को बहस तथा चर्चा से व्यक्त किया जाना चाहिए। गौरवशाली भारतीय होने के नाते हमें भारत की परिकल्पना तथा संविधान में निहित मूल्यों और सिद्धांतों में विश्वास रखना चाहिए। जब भी जरूरत पड़ी है देश स्थिति को सुधारने में समर्थ रहा है।

इस अवसर पर श्री मुखर्जी ने कहा कि भारत का मीडिया न केवल समाचार देता है बल्कि वह शिक्षक की भी भूमिका में रहता है और नागरिकों को अधिकार संपन्न बनाने के साथ साथ देश के लोकतांत्रकि ढांचे को भी मजबूत बनाता है। इस वर्ष के राष्ट्रीय प्रेस दिवस के थीम कार्टून और हास्य चित्र पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ये लोगों का तनाव दूर करते हैं । कार्टूनिस्ट अपने समय के मूड को भांप कर बिना किसी को चोट पहुंचाये अपनी कला से ऐसी बातें कह देता है, जो लंबे लेखों में भी व्यक्त नहीं हो पातीं। 

उन्होंने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जाने माने कार्टूनिस्ट वी शंकर से बातचीत करने उनके घर चाय पीने जाते थे और उनसे कहते थे , “ शंकर मुझे भी मत बख्शना” । उन्होंने कहा कि खुले विचार और सकारात्मक आलोचना हमारे देश की परंपरा है जिसे सहेज कर रखने के साथ साथ मजबूत बनाया जाना चाहिए। 

16 नवम्बर 1966 में प्रेस परिषद् के गठन के बाद से इस दिन को हर वर्ष राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

 

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सम्पादक

डॉ. लीना