Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

मीडिया अपनी विश्वसनीयता बरकरार रखे: नायडू

उपराष्ट्रपति ने पत्रकार अनुराधा प्रसाद दिया शैलीकार प्रभाकर सम्मान

नयी दिल्ली/ उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि मीडिया को खबर देते समय सनसनी फैलाने से बचना चाहिए और अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रखना चाहिए। श्री नायडू ने यहां एक समारोह में जानी-मानी पत्रकार और BAG नेटवर्क और न्यूज़ 24 की चेयरपर्सन श्रीमती  अनुराधा प्रसाद को सुप्रसिद्ध लेखक, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी पंडित कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ की स्मृति में स्थापित शैलीकार प्रभाकर सम्मान प्रदान करने के बाद यह बात कही। इस अवसर पर केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारित में विश्वसनीयता सबसे बड़ी चीज है। सूचना यदि प्रामाणिक और यथातथ्य है तो वह हथियार से ज्यादा प्रभावी साबित होती है। उन्होंने कहा कि समाचार की जिस विषयवस्तु से लोगों की संवेदनाएं आहत होती है, वह चिन्ताजनक है और इस समस्या का सबसे अच्छा उपाय यह है कि मीडिया स्वनियमन करे। उन्होंने औपनिवेशिक शासन से देश को आजादी दिलाने और स्वतंत्रता के बाद देश के लोकतंत्र को मजबूत करने में मीडिया की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्साहपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि पिछले कुछ वर्षों में समाचार की गुणवत्ता में बदलाव आया है और जो खबर पहले ‘फिलर’ के लायक भी नहीं मानी जाती थी, वह आज ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बन गयी है और कई बार तो बिना किसी तैयारी के कही गयी टिप्पणियों को खबर की सुर्खी बना दिया जाता है।

तीन दशक से ज्यादा पत्रकारिता कर रही अनुराधा प्रसाद की गिनती देश की अव्वल पत्रकारों में की जाती है। इस मौके पर श्रीमती अनुराधा ने कहा कि आज कल मीडिया अपनी भूमिका नहीं समझ पा रहा है और हम सबकी जिम्मेदारी है कि पत्रकारिता को सही दिशा दी जाए। उन्होंने कहा कि आजकल मीडिया की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने देश की मौजूदा पत्रकारिता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज की ज्यादातर मीडिया एक तरफ की ही बात करती है जो स्वस्थ समाज और देश के लिए नुकसानदेह है। 

Go Back

Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;cff38901a92ab320d4e4d127646582daa6fece06175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;c1ebe705c563d9355a96600af90f2e1cfdf6376b175;250;911552ca3470227404da93505e63ae3c95dd56dc175;250;752583747c426bd51be54809f98c69c3528f1038175;250;ed9c8dbad8ad7c9fe8d008636b633855ff50ea2c175;250;969799be449e2055f65c603896fb29f738656784175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना