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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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भारतीय प्रेस परिषद को मिल सकती है और शक्तियां

परिषद ने किया है प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के संशोधन का प्रस्‍ताव
सूचना और प्रसारण राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री मनीष तिवारी ने आज लोकसभा में बताया कि मीडिया द्वारा किए जा रहे अनैतिक व्‍यवहार की रिपोर्ट प्राप्‍त हुई है। भारतीय प्रेस परिषद, जो भारत में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानक बनाये रखने और उनमें सुधार करने के लिए गठित एक सांविधिक स्‍वायत्‍तशासी निकाय है, ने ‘पत्रकारिता आचरण के लिए मानदंड’ बनाए हैं, जिसके दायरे मे पत्रकारिता के सिद्धांतों और नैतिक मूल्‍यों को शामिल किया गया है जिनका अनुपालन मीडिया द्वारा किया जाना चाहिए। विगत कुछ समय से कई ऐसी मीडिया रिपोर्टें भी देखी गईं हैं कि इलैक्‍ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के कुछ वर्गों ने ऐसे कुछ व्‍यक्ति या संगठन या कॉरपोरेट सत्‍ता विशेष के पक्ष मे प्रकाशन या प्रसारण के लिए धन प्राप्‍त किया, जिनके लिए यह निश्‍चय ही समाचार के स्‍वरूप वाला छदमवेशी ‘विज्ञापन’ रहा है। भारतीय प्रेस परिषद ने इस अनैतिक व्‍यवहार के मुद्दे का संज्ञान लिया है और संदत्‍त समाचार पर एक रिपोर्ट निकाली है। रिपोर्ट में की गई सिफारिशें संदत्‍त समाचार की इस समस्‍या के समाधान के लिए एक व्‍यापक नीति और संस्‍थागत तंत्र का सुझाव देने के लिए विचाराधीन है।
भारतीय प्रेस परिषद ने यह देखते हुए प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के अधीन प्रदत्‍त शक्तियां इसके लिए दिशानिर्देशों के प्रभावी कार्यान्‍वयन के लिए पर्याप्‍त नहीं है, प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के संशोधन का प्रस्‍ताव किया है। भारतीय प्रेस परिषद ने इलैक्‍ट्रॉनिक और सामाजिक मीडिया को इस अधिनियम के दायरे में लाने के लिए इसमें संशोधन करने का प्रस्‍ताव किया है। इसके अतिरिक्‍त, कुछ बड़े संशोधनों का आशय परिषद को पत्रकारिता के नैतिक मूल्‍यों का उल्‍लंघन करने वालों के संबंध में और शक्तियां प्रदान करना है, जैसे सरकारी विज्ञापनों को वापस लेना, समाचार पत्र का पंजीकरण और संपादक या पत्रकार का प्रत्‍ययपत्र निलंबित करना। प्रस्‍तावित संशोधनों मे भारतीय प्रेस परिषद को सरकारी सहित किसी प्राधिकारी के आचरण के संबंध में दिशानिर्देश देने की शक्ति प्रदान करने की भी अभिकल्‍पना है।
प्रस्‍तावित संशोधन जांच के चरण में हैं, और यदि आवश्‍यक समझा गया तो, प्रेस परिषद अधिनियम के संशोधन का प्रारूप ध्‍यानपूर्वक तैयार किया जाएगा, जिसके लिए पणधारियों से व्‍यापक परामर्श किया जाएगा और मीडिया से जुड़े़ महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर सर्वसम्‍‍मति से प्राप्‍त की जाएगी।

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना