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पीसीआई ने की पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने की मांग

दिल्ली/ प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने उत्तर प्रदेश में एक मुस्लिम बुजुर्ग पर हमले की रिपोर्ट करने पर द वायर  और वरिष्ठ पत्रकारों सहित कई अन्य लोगों खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की निंदा की है। पीसीआई ने पत्रकारों के खिलाफ प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में ''जल्द से जल्द'' हस्तक्षेप करने की अपील की।

प्रेस क्लब ने कहा, ‘पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध घटनाओं के आधार पर फॉलोअप समाचार और ट्वीट किसी भी तरह से सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन नहीं करते हैं, नफरत और सामाजिक तनाव नहीं फैलाते हैं, जैसा कि एफआईआर में आरोप लगाया गया है।’

बयान पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष उमाकांत लखेड़ा और महासचिव विनय कुमार के हस्ताक्षर हैं. पत्र में कहा गया है कि एफआईआर दर्ज करना स्पष्ट रूप से गाजियाबाद पुलिस की बदलने की भावना को दर्शाता है ताकि मीडिया और समाज में बड़े पैमाने पर राज्य के आतंक की भावना पैदा की जा सके।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा करने के लिये मंगलवार को ट्विटर इंक, ट्विटर कम्युनिकेशन्स इंडिया, समाचार वेबसाइट द वायर, पत्रकारों मोहम्मद जुबैर और राणा अय्यूब, कांग्रेस के नेताओं सलमान निजामी, मश्कूर उस्मानी, डॉ शमा मोहम्मद और लेखिका सबा नकवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

द वायर  ने में बताया है कि मंगलवार रात 11:20 बजे पर दायर एफआईआर में ऑल्ट न्यूज के पत्रकार मोहम्मद जुबैर, पत्रकार राना अयूब, मीडिया संगठन द वायर, कांग्रेस नेता सलमान निजामी, मशकूर उस्मानी, शमा मोहम्मद, लेखक सबा नकवी और ट्विटर इंक एवं ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामित हैं।

बता दें कि 15 जून को द वायर  ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि गाजियाबाद जिले के लोनी में एक मुस्लिम बुजुर्ग पर हमला किया गया था। इस रिपोर्ट में कई अन्य रिपोर्टों के हवाले से कहा गया था कि यह हमला पांच जून को उस समय हुआ था, जब ये बुजुर्ग नमाज के लिए मस्जिद जा रहे थे. अब्दुल समद (72 वर्ष) नाम के शख्स का आरोप था कि पांच जून को उन पर हमला किया गया. हमलावरों ने उनकी दाढ़ी भी काट दी, जैसा कि वायरल वीडियो में देखा जा सकता था. द वायर  की रिपोर्ट कई अन्य समाचार रिपोर्टों पर आधारित थी और उनके लिंक रिपोर्ट में मुहैया कराए गए थे।

प्रेस क्लब ने पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर को रद्द करने की मांग की है और सभी पत्रकार संगठनों से इस तरह की प्रतिशोध की राजनीति और स्वतंत्र मीडिया हस्तियों और संगठनों के खिलाफ अभद्रता के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया है।

बयान में कहा गया, ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया सच्चाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के साथ खड़ा है।’

आगे कहा गया, ‘उत्तर प्रदेश सरकार से एक और अपील कि वह हस्तक्षेप करे और यह सुनिश्चित करे कि एफआईआर दर्ज करके पत्रकारों को पुलिस की मनमानी का आसान निशाना न बनाया जाए। ’

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना