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____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पीआईबी के सहायक निदेशक संजय कुमार को मिला विशेष अल्यूमिनी अवार्ड

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड ब्यॉज एसोसिएशन, बिहार शाखा ने मनाया सर सैयद डे, ए.एम.यू. के पूर्व छात्र रहे हैं प्रेस इंफोरमेशन ब्यूरो पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार

पटना । अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड ब्यॉज एसोसिएशन, बिहार शाखा द्वारा ए.एम.यू. पूर्व छात्र और प्रेस इंफोरमेशन ब्यूरो पटना के सहायक निदेशक संजय कुमार को खास तौर से उनके कार्यो को देखते हुये ‘अल्यूमिनी अवार्ड’ से  सम्मानित किया गया। द वायर की वरिष्ठ पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड ब्यॉज एसोसिएशन, बिहार शाखा द्वारा महान शिक्षाविद् और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की याद में रविवार की पटना में आयोजित सर सैयद डे सेलिब्रेशन 2018 के दौरान संजय कुमार को सम्मानित किया।

एएमयू से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले भागलपुर के संजय कुमार ने मीडिया सहित विभिन्न विषयों पर कई पुस्तकें लिखी है। उन्होंने 1989-90 में ए.एम.यू. के पत्रकारिता विभाग से पढाई की और इसी दौरान पत्रकारिता करते रहे। 1993 में भारतीय सूचना सेवा में आ गये। अपने कैरियर में आकाशवाणी एवं दूरदर्शन समाचार में समाचार सम्पादक के पद पर सेवा दी। रक्षा मंत्रालय की पत्रिका ‘सैनिक समाचार’ में भी सम्पादक रहे। साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विभिन्न इकाई में काम किया ।

फ़िलहाल, प्रेस इंफोरमेशन ब्यूरो, पटना में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत है। पत्रकारिता एवं लेखन के साथ साथ गौरैया संरक्षण में पिछले 11 साल से सक्रिय हैं ।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड ब्यॉज एसोसिएशन, बिहार शाखा की ओर से पटना में रविवार की रात आयोजित ‘सैयद डे सेलिब्रेशन 2018’  को सबोधित करते हुए द वायर की वरिष्ठ पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने  कहा कि सर सैयद अहमद खान कहते थे शिक्षा सबके लिए जरूरी है और यह सबको मिलनी ही चाहिए। खासकर महिलाओं को हर क्षेत्र में लाने के लिए उन्हें शिक्षित करना होगा।  आरफा खानम शेरवानी ने कहा कि अभी मिनिमम जर्नलिज्म हो रही है। जबकि पूरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरे पत्रकारिता जीवन को संवारने में एएमयू की अहम भूमिका है। 

इस अवसर पर पारस अस्पताल के जाने माने सर्जन डा. ए ए हई ने कहा कि सर सैयद एक आंदोलन है एक संस्कृति है ऐसे महान व्यक्ति को भुलाया नहीं जा सकता। हालांकि आज एक और सर सैयद की जरूरत है।

इस अवसर पर पोस्टमास्टर जेनरल बिहार, एम ई हक ने कहा कि सर सैयद ने आधुनिक शिक्षा की जो पहल की आज भी उसका विरोध दिख जाता है। सर सैयद के बाद एक भी एएमयू   के तर्ज पर कोई पहल नहीं दिखी।

पटना विश्वविद्यालय, अंगे्रजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. शंकर दत्त ने कहा कि आज संस्कृति का अतिक्रमण हो रहा है और मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। इसे रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सर सैयद ने शिक्षा के मंदिर के निर्माण में काफी विरोध का सामना किया था लेकिन उनके अंदर एक जुनून था कि शिक्षा का एक ऐसा मंदिर बना जहां गंगा जमुनी संस्कृति कायम हो जो हुआ।

एएमयू  छात्र संध के अध्यक्ष डा.एम ए उसमानी, एएमयू के ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन, बिहार चैपटर के अध्यक्ष ई.आमीर हसन और महासचिव डा.अरशद एस हक ने सर सैयद के व्यक्त्तिव और कृत्तिव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सर सैयद ने शिक्षा का मंदिर बना कर जो सपना देखा था वह जमीनी हकीकत में दिख तो रहा है जरूरत है इसे और व्यापक बनाया जाये।

इस मौके पर विभिन्न स्कूलों के बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया जिन्होंने एसोसिएशन की ओर से आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। आयोजन के दौरान अतिथियों ने एक वार्षिक पत्रिका का भी विमोचन किया गया जिसमें सर सैयद के विचारों को साझा किया गया है। कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय के तराना ‘यह मेरा चमन है मेरा चमन मैं अपने चमन का बुलबुल हूँ’ और जन मन गण... राष्ट्रीय गान से हुआ।

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना