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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पटियाला हाउस में आज फिर हंगामा

चहुंओर निंदा

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पटियाला हाउस अदालत में आज फिर से वकीलों द्वारा हंगामा किए जाने और पेशी के लिए लाए गए जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्र नेता कन्हैया कुमार पर हमले के मामले को गंभीरता से लेते उसके मामले की सुनवाई को फिलहाल रोकने का निर्देश दिया। इस बीच एक पत्रकार तारिक अनवर ने वकीलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने आज उनके साथ बदसलूकी की। वह इसके सबूत पेश कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब यह सब कुछ हो रहा है था तब पुलिस मूकदर्शक बन खड़ी रही। 

सोमवार को भी जब कन्हैया को अदालत लाया जाना था वहां कुछ वकीलों ने कन्हैया के समर्थक छात्रात्रों, शिक्षकों और पत्रकारों के साथ मारपीट की थी। इस घटना के विरोध में कल पत्रकारों ने बकायदा एक विरोध जुलूस निकाला और घटना के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपा । 

बुधवार को भी कन्हैया को पेशी के लिए अदालत लाए जाने के पहले फिर यहां हंगामा शुरू हुआ।पटियाला हाउस कोर्ट में 15 फरवरी की घटना आज फिर दोहराये जाने की चहुंओर निंदा की जा रही है। सोशल मीडिया पर भी ऐसे पोस्ट देखने को मिल रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश फेसबुक पर लिखते हैं कि - इतने विरोध और निन्दा के बावजूद पटियाला हाउस कोर्ट में 15  फरवरी की घटना आज फिर दोहरायी गयी. क्या यह दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की सहमति और सहयोग के बगैर संभव है? जिन 'फासिस्ट हिन्दुत्ववादियों' ने 15 फरवरी को छात्रों-शिक्षकों और पत्रकारों पर हमला किया था, उन्हीं गुंडों ने आज भी हमले का नेतृत्व किया. Jnu छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया को नारेबाजी के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया पर bjp के शीष॓ नेताओं के साथ फोटो में दिखने वाले फासिस्ट गुंडों को पहचान के बावजूद गिरफ्तार नहीं किया गया. नतीजतन, आज फिर कोट॓ परिसर में हमला हुआ. कन्हैया कुमार सहित कई छात्रों और पत्रकारों को भी पीटा गया. आख़िर इसे क्या कहेंगे? क्या दिल्ली में कानून का शासन है? यह फासिज्म नहीं तो और क्या है? हमने तो इमजे॓न्सी भी देखी थी. उस वक्त भी कोट॓ में ऐसे हमले नहीं हुए! हिन्दुत्ववादी फासिस्टों और उनके पालतू गुंडों ने लोकतंत्र पर हमला कर दिया है! लोग अब तय करे-वे किधर हैं? अब आप तटस्थ नहीं रह सकते, वरना देश और लोकतंत्र नहीं बचेगा. . अब तो अवाम और देश की सुप्रीम कोट॓ से ही आशा है.

संजीव चन्दन ने अपने वाल पर लिखा है कि - दिल्ली पुलिस चीफ बस्सी को बर्खास्त करना चाहिए . कल यदि मारपीट करने वाले वकील चौहान गिरफ्तार होता तो आज मारपीट नहीं होती कोर्ट में।

 

 

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सम्पादक

डॉ. लीना