Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

पटना पुस्तक मेला 4 से

इस बार पुस्तक मेला का थीम है "पढ़ेगा बिहार - बढ़ेगा बिहार "

साकिब ज़ियापटना। सीआरडी की ओर से आयोजित किया जाने वाला पटना पुस्तक मेला इस बार फिर बिहार के पाठकों के लिए जल्द ही शुरू होने वाला है। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में इस मेला का आयोजन 4से 15दिसंबर तक किया जाएगा। पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में संस्था, सेंटर फॉर रीडरशिप डेवलपमेंट, सीआरडी के अध्यक्ष रत्नेश्वर ने बताया कि इस बार के पटना पुस्तक मेला का विचार है "पढ़ेगा बिहार - बढ़ेगा बिहार "।

इस बार पुस्तक मेला में तीन सौ प्रकाशकों के भाग लेने की संभावना है। कार्यक्रमों की श्रृंखला में जनसंवाद, सृजन बिहार, बाल पाल, बाल नुक्कड़, कहवा घर, कॉफी हाउस, मुशायरा नयी सदी की कविताई, मेड इन इंडिया जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। सृजन बिहार कार्यक्रम में विषय और विशेषज्ञ दोनों ही "बिहार" होगा। स्टार गुप के सीईओ उदय शंकर, इंडिया टीवी के एडीटर अजीत अंजुम, एबीपी के एडीटर शाजी जमा, लेखिका गीताश्री, कवि सत्यनारायण, पद्मश्री उषाकिरण खान जैसे बिहार की माटी से जुड़े चर्चित नाम शामिल होंगे। कहवा घर कार्यक्रम में चर्चित लेखक आलोचक नंदकिशोर नवल के साथ बातचीत रखी गई है। वहीं कॉफ़ी हाउस के अंतर्गत दैनिक हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर के साथ बातचीत करेंगे लाइव इंडिया न्यूज़ चैनल के मैनेजिंग एडीटर संजीव पालीवाल। पटना पुस्तक मेला में "मेड इन इंडिया" कला दीर्घा को एक नये विचार और नये स्वरूप में राष्ट्रीय स्तर का किया जाएगा जिसमें देश के बारह कलाकार अपनी कलाकृतियों को प्रदर्शित करेंगे। इसके अलावा साहित्य, पत्रकारिता, रंगकर्म और कला के क्षेत्र में बेहतर योगदान देने वाले बिहार के लोगों को भी पिछले वर्षों की तरह ही इस साल भी विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पत्रकार वार्ता में पटना पुस्तक मेला के अध्यक्ष एच एन गुलाटी, सीआरडी के सचिव अमरेन्द्र झा, डॉ ध्रुव कुमार ने भी भाग लिया।

साकिब ज़िया मीडियामोरचा के ब्यूरो चीफ हैं

 

Go Back

Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;cff38901a92ab320d4e4d127646582daa6fece06175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;c1ebe705c563d9355a96600af90f2e1cfdf6376b175;250;911552ca3470227404da93505e63ae3c95dd56dc175;250;752583747c426bd51be54809f98c69c3528f1038175;250;ed9c8dbad8ad7c9fe8d008636b633855ff50ea2c175;250;969799be449e2055f65c603896fb29f738656784175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना