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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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नहीं रहे जाने माने कवि और पत्रकार पंकज सिंह

नई दिल्ली। जाने माने कवि और पत्रकार पंकज सिंह नहीं रहे । नोएडा स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान आज  उनका निधन हो गया। वे पूर्वी चंपारण के चैता के निवासी थे। राष्ट्रीय पत्रकारिता में उनकी खास पहचान थी। बीबीसी हिन्दी सेवा में उन्होंने काफी नाम कमाया था। 

उनके निधन पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश जी ने सोशल मीडिया फेसबुक पर लिखा कि सबसे पहले ओम पीयूष ने रोते हुए यह दुखद सूचना मुझे दी। कुछ देर पहले आनंद स्वरूप वर्मा, सुरेश सलिल और ईश मिश्रा से भी इस बाबत फोन पर बात हुई। उनके आकस्मिक और असमय निधन की खबर से हम सब स्तब्ध हैं। पंकज जी जेएनयू में हमारे सीनियर थे लेकिन हर पीढ़ी के जेएनयूआइट्स के साथ उनका आत्मीय रिश्ता था। मैं और मेरे पूरे परिवार को उनके असमय निधन से गहरा दुख हुआ। अपने छात्र-जीवन में संस्कृति और सियासत से जुड़ी तमाम तरह की गतिविधियों में हम लोग लंबे समय तक मिलते-जुलते रहे। जेएनयू की पहाडि़यों पर बैठकर घंटों हम लोग पंकज जी से फैज़ साहब की नज्में सुना करते थे। और वह फैज को गाने का हमारा अनुरोध कभी नामंजूर नहीं करते। जीवंतता और साहस से भरे साथी पंकज सिंह को हमारी श्रद्धांजलि।

जाने माने कवि और पत्रकार पंकज सिंह के निधन पर शोक की लहर है। श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। चर्चित साहित्यकार प्रेम कुमार मणि ने फेसबुक पर लिखा, अभी - अभी दुखद सूचना मिली कि प्रतिष्ठित कवि , पत्रकार और प्रखर बुद्धिजीवी साथी पंकज सिंह हमारे बीच नहीं रहे । वह हमारे बिहार के मुज़फ्फरपुर शहर से थे , लेकिन दशकों से वह दिल्ली में ही रहते थे। उन्होंने बी बी सी में काम किया और तब उनकी आवाज के जादू से लाखों लोग बंधे थे।  उनसे बातें करना हमेशा ज्ञानवर्धक होता था . सामान्य जन के लिए उनकी प्रतिबद्धता इतनी गहरी थी कि उस पर किसी तरह का समझौता उनसे संभव नहीं था। जब हमने जनविकल्प का प्रकाशन शुरू किया , तब वह बेहद खुश थे। फोन से सुझाव देते रहते थे। बिहार के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक हालात को लेकर वह लगातार चिंतित रहते थे ,लेकिन वह बुद्धिजीवियों की उस जमात में शामिल नहीं थे जो इन सबके पीछे राजनीति के मंडलीकरण को देखते हैं। उनका मन मिज़ाज पूरी तरह आधुनिक था। आज वह ऐसे समय में हमें छोड़ गए हैं, जब उनकी सबसे ज्यादा ज़रूरत थी। इसे स्वीकारना कि वह नहीं हैं, उनसे अब कभी मिलना नहीं होगा अत्यंत दुखद है। उनकी स्मृति को उदास प्रणाम, विनम्र श्रद्धांजलि ।

मीडियामोरचा की ओर से पंकज सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि । 

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना