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टीआरपी ने टेलिविज़न का अपहरण कर लिया है

सी भास्कर राव की पुस्तक ‘टी आर पी ट्रिक: हाउ टेलीविजन इन इंडिया वाज़ हाईजैक्ड’ का विमोचन

नयी दिल्ली/ प्रसार भारती के अध्यक्ष ए. सूर्य प्रकाश ने कहा है कि लोक प्रसारक के रूप में दूरदर्शन और आल इंडिया रेडियो देश की लोकतान्त्रिक एवं सांस्कृतिक विविधता को दिखाने तथा संरक्षित करने की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं लेकिन अन्य चैनल यह काम बिलकुल नहीं कर रहे हैं बल्कि वे टी आर पी से संचालित हो रहे हैं , इसलिए सभी मीडिया संस्थानों को वंचितों की आवाज़ को जगह देनी चाहिए और अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए ।

श्री सूर्यप्रकाश ने मंगलवार को यहाँ मीडिया अध्येता सी भास्कर राव की पुस्तक ‘टी आर पी ट्रिक .हाउ टेलीविजन इन इंडिया वाज़ हाईजैक्ड’ का विमोचन करते हुए यह बात कही। इस मौके पर ट्राई के सचिव सुनील गुप्ता, इसरो के शिक्षा एवं संचार विभाग के प्रमुख रहे एवं डिस्कवरी चैनल के पूर्व मुख्य पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष किरण कार्निक, प्रसिद्ध पत्रकार आलोक मेहता , भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक के जी सुरेश, टी वी पत्रकार अनुराधा प्रसाद अदि भी मौजूद थे।

श्री सूर्य प्रकाश ने कहा कि इस देश में 35 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं और निरक्षर हैं, इसलिए मीडिया की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह उन लोगों की आवाज़ बने जिनकी आवाज़ कोई नही सुनता। हर पत्रकार और मीडिया को इस बात की चिंता होनी चाहिए कि वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाए।

उन्होंने श्री राव की पुस्तक के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा ,“ देश के 40 प्रतिशत विज्ञापन टेलीविजन को मिल रहे हैं और अधिकतर चैनेल मनोरंजन प्रधान हो गये हैं तथा उनका केवल सात प्रतिशत समय समाचार के लिए होता है। अब समाचार केवल दूरदर्शन में दिखाए जाते हैं और शोर सुनने के लिए आप चैनल देख सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि लोक प्रसारक के रूप में दूरदर्शन एवं आॅल इंडिया रेडियो अपनी सामाजिक दायित्व निभा रहे हैं और देश की संस्कृति तथा विविधता का संरक्षण कर रहे हैं लेकिन किसी चैनल को इसकी चिंता नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल राजनीति तथा चुनाव तक सीमित नहीं बल्कि लोकतंत्र घर में भी होना चाहिए लेकिन टी वी में भी लोकतंत्र नही है। उन्होंने कहा कि एक सरकारी समिति के सदस्य के रूप में श्री राव ने चैनलों पर विज्ञापन दिखाए जाने का विरोध किया था और उसकी जगह कार्यक्रमों की स्पॉन्सरशिप का समर्थन किया था तथा समय सीमा भी निर्धारित करने की वकालत की थी लेकिन सरकार ने उसे नहीं माना। श्री राव ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पांच चरणों का जिक्र किया है जो अब टी आर पी से होते हुए कार्पोरेट से युग में पहुँच गया है।
श्री राव ने कहा कि वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का 35 वर्षों से अध्यन कर रहे हैं और इसके सामाजिक प्रभावों का भी विश्लेष्ण किया। केवल एक प्रतिशत लोगों ने टी आर पी मीटर को देखा है लेकिन इसी टी आर पी ने टी वी का अपहरण कर लिया है । कई बार मंत्रियों के सचिवों को सलाह दी लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

श्री कार्निक ने कहा कि टी वी का दर्शक केवल उपभोक्ता नहीं है बल्कि वह देश का नागरिक भी है। पर कुछ ही चैनल अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना