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 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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खाद्य सुरक्षा से ज्यादा जल सुरक्षा जरूरीः राजेन्द्र सिंह

सूचना भवन मुंगेर मे‘ प्राकृतिक संसाधन के दोहन को रोकने में मीडिया की भूमिका’ पर संगोष्ठी

मनोज सिन्हा / मुंगेर। विश्व बैंक की नजर गंगा की कमाई पर है, जबकि गंगा माई किसानों, मछुआरों के साथ गंगा तट पर बसे लोगों के जीविका का आधार है। गंगा के नाम पर वोट तो बटोरे गये, लेकिन सत्ता के गलियारें में पहुचते ही गंगा को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले करने पर सरकार अमादा है। आज जिस तरह प्राकृतिक संसाधनों से आम लोगों का हक छिनता जा रहा है, उस स्थिति में मीडिया को महात्मा गांधी की पत्रकारिता की भूमिका अदा करनी होगी। ये उद्गार मैग्सेसे एवार्ड से सम्मानित पुरूष राजेन्द्र सिंह ने सूचना भवन, मुंगेर में मुंगेर पत्रकार समूह द्वारा ‘  प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को रोकने में मीडिया की भूमिका पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि गंगा पर बराज बनाने के लिये विश्व बैंक की मदद से 300 करोड़ का डीपीआर बनाने को कहा कहा है। यह अच्छा है या खराब? उन्होंने कहा कि फरक्का पर बराज बनने का हश्र क्या हुआ, इससे सब वाकिफ हैं। जब 16 बराज बनेंगे तो स्थिति और खराब होगी। गंगा को लेकर सरकार की दो योजना  है। नमामि गंगा 3900 करोड़ की है। वहीं गगा यातायात 5900 करोड़ की है। उन्होंने कहा कि गंगा में बडे पोत चलाना किसी भी कीमत पर लाभकारी नहीं है।

उन्होंने मुंगेर के जिलापदाधिकारी और पत्रकारों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि मुगेर में गंगा से जुड़े तीन अहम् सवाल हैं। यहां गंगा का क्षेत्र 16 किलोमीटर लंबा है। जिला पदाधिकारी गंगा के तट पर हो रहे अतिक्रमण को रोकें। मीडिया राज और समाज को जोड़ने की कड़ी है। मीडिया का दायित्व है कि विस्थापन कैसे रूके, इसके लिये लोगों को जागरूक करे। आंकड़ों की जुवानी उन्होने कहा कि आजादी के समय देश के 232 गांवों में पानी नहीं था, लेकिन आज 2 लाख 56 हजार गांवों में पानी नहीं है। देश को खाद्य सुरक्षा से ज्यादा जल सुरक्षा की जरूरत है। शहर गंदा पानी गंगा में नहीं जाए, गंगा को लक्ष्य बनाकर गंगा की अविरलता के लिये काम करें।

संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मुंगेर के जिलापदाधिकारी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि आम जनमानस को जागृत करने में मीडिया की अहम भूमिका है। प्रकृति के  शोषण ने  पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिसके दुष्परिणाम को देख रहे हैं। जलपुरूष जैसे इस अभियान मे लगे है, इसमें सबकी सहभागिता जरूरी है।

इसके पूर्व विषय प्रवेश कराते हुए बरिष्ठ पत्रकार कुमार कृष्णन ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन देश के करोड़ों लोगों के जीविका का आधार है। पूंजीपतियों और कारपारेट द्वारा यह आधार भी छिना जा रहा है। गलत विकास नीति के कारण आज का मोल घट रहा है। गंगा का वेसिन 11 राज्यों में फैला हुआ है। इस क्षेत्र में 40 फीसदी आवादी रहती है। उत्तराखंड से लेकर फरक्का तक 600 बांध बन रहे हैं या बनने की योजना है। ये जहां गंगा की अविरलता को नष्ट कर रहे है, वहीं मौत की इवारत लिख रहे हैं।

मुंगेर कृषि वैज्ञानिक रामगोपाल शर्मा ने कहा कि वहुफसलीय प्रणाली की तकनीक अपना कर हम जल के दोहन को रोक सकते है। नबार्ड के जिला विकास प्रबंधक शीतांषु शेखर ने कहा कि जलपुरूष प्रेरणा स्त्रोत हैं। मीडिया को सकारात्मक भूमिका अदा करनी होगी।

संगोष्ठी को रामबिहारी सिंह, चंद्रशेखरम,  ग्रीन लेडी जया देवी, अवधेश कुमार, किशोर जायसवाल, नरेशचंद्र राय, इम्तियाज, अरूण कुमार शर्मा, सज्जन कुमार गर्ग, सुनील सोलंकी, रंजीत कुमार, सुनील कुमार सिंह, सुनील जख्मी, मनीष कुमार ने संबोधित किया। संगोष्ठी का समापन करते हुए जिला जनसंपर्क  पदाधिकारी ज्ञानेष्वर प्रकाश ने कहा कि मीडिया के किया गया यह सार्थक पहल है। जनसंपर्क का मुख्यकाम संवाद कायम करना और कायम करने में मदद के साथ साथ जन सामान्य की प्रतिक्रिया से वाकिफ कराना है।

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सम्पादक

डॉ. लीना