Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

अमलेंदु की चोटें गंभीर, हस्तक्षेप भी बाधित

हस्तक्षेप जारी रखने के लिए सहयोग की अपील

पलाश विश्वास शनिवार शाम दिल्ली में हस्तक्षेप के संपादक अमलेंदु उपाध्याय एक भयंकर दुर्घटना से बाल-बाल बच गये हैं। वे जिस आटो से घर लौट रहे थे, वह एक बस से टकरा गया। आटो उलट जाने से अमलेंदु और दो साथियों के चोटें आयीं। अमलेंदु की चोटें गंभीर हैं। अमलेंदु के दाएं हाथ में काफी चोटे आयी हैं और कल से हस्तक्षेप अपडेट नहीं हो पा रहा है। क्योंकि हस्तक्षेप अपडेट करने के लिए कोई दूसरा नहीं है। ऐसे समय में यह हस्तक्षेप के लिए भारी झटका है। उम्मीद है कि जल्द से जल्द वे काम पर लौटने की हालत में होंगे।

हस्तक्षेप जारी रखने के लिए सहयोग की अपील है। हम कितने अकेले और बेबस हैं, यह इसका नमूना है। मित्रों से निवेदन है कि हालात को समझें और जरूरी कदम उठायें ताकि हमारी आवाज बंद न हों। "हस्तक्षेप" के पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि सेहस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।

समयांतर पंकज बिष्ट जी की जिद पर अभी नियमित है तो समकालीन तीसरी दुनिया के लिए भी हम साधन जुटा नहीं पा रहे हैं।एक के बाद एक मोर्चा हमारा टूट रहा है और हम अपने किले बचाने की कोशिश में लगे नहीं है।

सत्तर के दशक से पंकज बिष्ट और आनंद स्वरुप वर्मा की अगुवाई में हम लगातार जो वैकल्पिक मीडिया बनाने की मुहिम में लगे हैं,अपने ही लोगों का साथ न मिलने से उसका डेरा डंडा उखड़ने लगा है।एक एक करके पोर्टल बंद होते जा रहे हैं।

भड़ास को यशवंत अकेले दम चला रहे हैं और वह मीडिया की समस्याओं से अब भी जूझ रहा है।

पिछले पांच साल से कुछ दोस्तों की मदद से हस्तक्षेप नियमित निकल रहा है और हम उसे राष्ट्रव्यापी जनसुनवाई मंच में बदलने की कोशिश में लगे हैं।

अमलेंदु हमारे युवा सिपाहसालार हैं और विपरीत परिस्थितियों में उसने मोर्चा जमाये रखा है। मित्रों से निवेदन है कि हालात को समझें और जरुरी कदम उठायें ताकि हमारी आवाज बंद न हों।

Go Back

Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;cff38901a92ab320d4e4d127646582daa6fece06175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;c1ebe705c563d9355a96600af90f2e1cfdf6376b175;250;911552ca3470227404da93505e63ae3c95dd56dc175;250;752583747c426bd51be54809f98c69c3528f1038175;250;ed9c8dbad8ad7c9fe8d008636b633855ff50ea2c175;250;969799be449e2055f65c603896fb29f738656784175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना