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सांस्कृतिक कैलेंडर का हुआ लोकार्पण

पटना/ बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ भवन में आखर की ओर से तैयार भोजपुरिया स्वाभिमान कैंलेंडर का आज लोकार्पण हुआ. आखर की ओर से तैयार इस सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल 12 व्यक्तित्वों के व्यक्तित्व, कृतित्व, नेतृत्व पर अलग-अलग वक्ताओं ने विस्तार से बात की. यह कैलेंडर वाल व टेबल कैंलेंडर के रूप में है, जिसमें कबीर, हीरा डोम, महेंदर मिसिर, भिखारी ठाकुर, मोती बीए, मोहम्मद खलील, बिस्मिल्ला खान, बाबू रघुवीर नारायण, डाॅ राजेंद्र प्रसाद, विश्वनाथ शाहाबादी, चित्रगुप्त, शारदा सिन्हा जैसे सांस्कृतिक नायकों को शामिल किया गया है.

आयोजन की शुरुआत पटना नौका हादसे के शिकार लोगों को श्रद्धांजलि के साथ हुई. दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी इसके बाद आयोजन शुरू हुआ. इस आयोजन में पहला वक्तव्य भोजपुरी के मूर्धन्य साहित्यकार पांडेय कपील ने रखा. पांडेय कपील भोजपुरी संस्थान के संस्थापक हैं और उन्होंने भोजपुरी में फुलसंुघी जैसी कालजयी रचना की है. पांडेय कपील ने कहा कि आखर का यह प्रयास अभूतपूर्व है. ऐसे दौर में जब सांस्कृतिक और साहित्यिक दूतों की स्मृतियां मानस पटल से उतरती जा रही हैं, आखर ने नयी उम्मीद जगायी है. भोजपुरी की जड़ें बहुत गहरी हैं. आखर उन जड़ों की तह तक जाकर साहित्य की अमृतधारा को निकालने का काम कर रहा है. यह कैलेंडर उसी दिशा में एक कदम है. शिवानंद तिवारी ने कहा कि भोजपुरी साहित्य कोश साहित्य की सभी विधाओं को अपने अंदर समेटे हुए है. जरूरत है उस कोष पर एक कंकड़ फेंकने की ताकि समग साहित्य छलक कर बाहर आये और लोगों के जेहन में समा जाये. वर्षों बाद आखर ने वह कंकड़ फेंका है. भाजपुरी अकादमी के अध्यक्ष डाॅ चंद्रभूषण राय ने कहा कि अकादमी और संस्थान साहित्य का पोषण और संवर्द्धन करने में नाकाफी साबित हो रहे हैं. आखर ने जनसमुदाय को उकसाया है. साहित्य का सृजन करने के लिए और साहित्य का पोषण करने के लिए भी. यह एक नयी परंपरा की शुरुआत है.

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पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना