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विज्ञान से ही ग़लत धारणाओं और अंधविश्वास का विनाश संभव

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आयोजित व्याख्यान में विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार

पटना/ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को कालेज आफॅ कामर्स आर्ट्स एण्ड साइंस पटना में व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। व्याख्यान का आयोजन आई. क्यू. ए. सी. और भौतिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। व्याख्यान को संबोधित करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. एन. के. पांडेय ने वैज्ञानिक स्वभाव पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में फैली भ्रांतियों और अंधविश्वास को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना कर ही दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कि हमारे समाज में आज भी पीपल के पेड़ पर भूत का रहना, महिलाओं के मासिक धर्म, जादू टोना तथा सूर्य ग्रहण के बारे में फैली बहुत सारी भ्रांतियां और अंधविश्वास को तार्किक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कि इन भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश स्कूल के स्तर से ही की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कि समाजिक समस्याओं का समाधान वैज्ञानिक सोच से ही संभव है।

राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित दिल्ली की श्रीमती प्रज्ञा नोपानी ने अवलोकन और अनुमान विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी चीज़ या घटना को वैज्ञानिक नज़रिए से देखा तभी उसको सही तरीके से समझा जा सकता है। तीसरे व्याख्यान में एल. एन. मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राजमणी प्रसाद सिंहा ने स्पेक्टरोस्कोपी विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रामिकी, भौतिक विज्ञान की एक शाखा है जिसमें पदार्थों द्वारा उत्सर्जित या अवशोषित विधुत चुंबकीय विकिरणों के स्पेक्ट्रम का अध्ययन किया जाता है और इसी अध्ययन से पदार्थ की आंतरिक रचना का ज्ञान प्राप्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस शाखा में मुख्य रूप से वर्णक्रम का ही अध्ययन होता है इसलिए इसे स्पेक्टरोस्कोपी कहते हैं।

अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रिंसिपल प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि विज्ञान के बिना विकास की राह पर तेज़ी से आगे नहीं बढ़ा जा सकता।  देश के विकास के लिए वैज्ञानिक सोच का प्रसार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस जैसे आयोजन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार में निश्चित रूप से सहायक सिद्ध हो सकते हैं। व्याख्यान का विषय प्रवेश भौतिकी के विभागाध्यक्ष प्रो. बी. सी. राय ने कराया। इस अवसर पर अन्य लोगों के अलावा प्रो. बिन्दु सिंह ने भी अपने विचार रखे। मंच का संचालन आईक्यएसी के समन्वयक प्रो संतोष कुमार किया जबकि धन्यावाद ज्ञापन रसायन विभाग की डॉ. स्मिता ने किया। व्याख्यान में अन्य लोगों के अलावा बरसर प्रो. मनोज कुमार, प्रो. जय मंगल देव,  पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के डीएसडब्लू प्रो.ए. नाग, प्रो. ए.के. भास्कर, प्रो. कुमार चन्द्रदीप, प्रो. सफदर इमाम क़ादरी, प्रो. मुनव्वर फ़ज़ल, प्रो. सांत्वना रानी समेत बड़ी संख्या शिक्षक और छात्र - छात्राएं उपस्थित थे।

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