Menu

 मीडियामोरचा

____________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

Print Friendly and PDF

गोरखपुर दूरदर्शन अर्थ स्टेशन का होगा लोकार्पण

तीन एफ एम आल इंडिया रेडिया स्टेशनों का भी वर्चुअल उद्घाटन किया जायेगा

लखनऊ/ केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण,युवा मामले तथा खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कल गोरखपुर दूरदर्शन केंद्र में लगभग सात करोड़ की लागत से स्थापित प्रदेश के दूसरे अर्थ स्टेशन का लोकार्पण करेंगे। उनके साथ लोकसभा सांसद रवि किशन ,आकाशवाणी के प्रधान महानिदेशक एन. वेणुधर रेड्डी और दूरदर्शन के महानिदेशक श्री मयंक अग्रवाल और समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस मौके पर ईटावा, गदनिया (लखीमपुर) और नानपारा (बहराइच) में 10 -10 किलोवाट के नवनिर्मित तीन एफ एम आल इंडिया रेडिया स्टेशनों का भी वर्चुअल उद्दघाटन किया जायेगा।इन एफ एम रेडियो स्टेशनो के अस्तित्व में आने के बाद आल इंडिया रेडियो की आवाज लखीमपुर, इटावा ,बहराइच और भारतीय-नेपाल सीमा के उन दूरवर्ती इलाकों और 1 करोड़ 5 लाख लोगों तक पहुंच सकेगी जहां तक आल इंडिया रेडियो की मौजूदगी नहीं थी. ये तीनों एफ एम स्टेशन 30 हजार स्कवायर किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करेंगे। ये रेडियो स्टेशन उत्तर प्रदेश के हृदय क्षेत्र में महत्वपूर्ण शहर इटावा में और उसके आसपास 60 किमी के रेडियल क्षेत्र में मजबूत एफएम कवरेज प्रदान करेगें। उत्तर प्रदेश, आगरा और कानपुर के दो सबसे प्रमुख शहरों के बीच वाहनों में यात्रा करने वाले लोगों का भी मनोरंजन करेगा। महत्वपूर्ण मुद्दों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश की भारत-नेपाल सीमा के साथ नानपारा और गडानिया में एफएम ट्रांसमीटर स्थापित किये गये है। ये ट्रांसमीटर उत्तर प्रदेश, गडानिया और नानपारा के रणनीतिक शहरों में और उसके आसपास 60 किमी के रेडियल क्षेत्र में मजबूत एफएम कवरेज प्रदान करेंगे।

गोरखपुर अर्थ स्टेशन के शुरू होने का सर्वाधिक फायदा स्थानीय कलाकारों को होगा जिनके कार्यक्रम अब दुनिया भर में डीटीएच के जरिए उपलब्ध होंगे। देशवासी जल्द ही गोरखपुर दूरदर्शन केंद्र के कार्यक्रम (डायरेक्ट टू होम) डीटीएच पर देख सकेंगे।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर गोरखपुर के दूरदर्शन केंद्र में अर्थ-स्टेशन लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। एसएसबी की 59वीं बटालियन के परिसर में दूरदर्शन ने इस स्टेशन के निर्माण की शुरुआत 2019 में की थी। 25 करोड़ रुपये की लागत से एफएम रेडियो स्टेशन बनकर तैयार हो गया है.सैटेलाइट ट्रांसमिशन नेटवर्क के माध्यम से सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनलों के लिए स्थानीय संस्कृति और समाचार और सम-सामयिक मामलों की सामग्री के योगदान के लिए दूरदर्शन के पास 40 अर्थ स्टेशन हैं। दूरदर्शन ने डीडीके गोरखपुर में सी बैंड अर्थ स्टेशन को शामिल किया जो उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्वांचल जिलों की स्थानीय संस्कृति सामग्री, समाचार और करंट अफेयर्स को दूरदर्शन के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनलों के लिए उपग्रह लिंक के माध्यम से बहुत तेजी से योगदान करने में सक्षम बनाता है .डीडीके गोरखपुर में स्टूडियो परिसर में स्टूडियो भवन के बगल में न्यू अर्थ स्टेशन भवन का निर्माण किया गया था। डीडीके गोरखपुर का अर्थ स्टेशन (1+1) विन्यास में है और अत्याधुनिक एमपीईजी-2/एमपीईजी-4 अनुरूप एसडी/एचडी संपीड़न श्रृंखला और स्पेक्ट्रम कुशल डीवीबी-एस/डीवीबी-एस2 अनुरूप आरएफ श्रृंखला उपकरण से लैस है और अपलिंक करने में सक्षम है। डीडीके गोरखपुर का अर्थ स्टेशन जीसैट-17 सैटेलाइट के माध्यम से डीडी नेटवर्क के अन्य अर्थ स्टेशनों के साथ टाइम शेयरिंग मोड में संचालित किया जाएगा। डीडीके गोरखपुर का अर्थ स्टेशन सरकार की स्वीकृत योजना के तहत प्रदान किया गया है।

Go Back

Comment

नवीनतम ---

View older posts »

पत्रिकाएँ--

175;250;cff38901a92ab320d4e4d127646582daa6fece06175;250;e3ef6eb4ddc24e5736d235ecbd68e454b88d5835175;250;25130fee77cc6a7d68ab2492a99ed430fdff47b0175;250;7e84be03d3977911d181e8b790a80e12e21ad58a175;250;c1ebe705c563d9355a96600af90f2e1cfdf6376b175;250;911552ca3470227404da93505e63ae3c95dd56dc175;250;752583747c426bd51be54809f98c69c3528f1038175;250;ed9c8dbad8ad7c9fe8d008636b633855ff50ea2c175;250;969799be449e2055f65c603896fb29f738656784175;250;1447481c47e48a70f350800c31fe70afa2064f36175;250;8f97282f7496d06983b1c3d7797207a8ccdd8b32175;250;3c7d93bd3e7e8cda784687a58432fadb638ea913175;250;7a01499da12456731dcb026f858719c5f5f76880175;250;0e451815591ddc160d4393274b2230309d15a30d175;250;ac66d262fc1ac411d7edd43c93329b0c4217e224175;250;ff955d24bb4dbc41f6dd219dff216082120fe5f0175;250;028e71a59fee3b0ded62867ae56ab899c41bd974175;250;460bb56d8cde4cb9ead2d6bff378ed71b08f245d

पुरालेख--

सम्पादक

डॉ. लीना